
रांची : झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच राजधानी रांची में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर नया विवाद सामने आया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के 34 मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से उनके नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। इस संबंध में प्रभावित लोगों ने रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
भाग संख्या 226 के मतदाताओं ने की शिकायत
शिकायत के अनुसार, मामला रांची विधानसभा क्षेत्र की भाग संख्या 226 से जुड़ा है। यहां रहने वाले 34 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित रूप से फॉर्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया। संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से हिंदपीढ़ी क्षेत्र में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से इलाके में मौजूद हैं। ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से यह पता लगाने की मांग की है कि फॉर्म में दर्ज जानकारियां किस आधार पर दी गईं और उनका सत्यापन किस स्तर पर किया गया।
बीएलए-2 के माध्यम से आवेदन देने का आरोप
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बीएलए-2 मोहम्मद यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए आवेदन जमा कराया गया। फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। हालांकि, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। मतदाताओं का कहना है कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाना गंभीर विषय है। यदि गलत सूचना या जानबूझकर दिए गए आवेदन के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग
शिकायत में फॉर्म-7 से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि आवेदन में दी गई जानकारी, हस्ताक्षर, दस्तावेज और आवेदनकर्ता की भूमिका की विस्तार से जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रभावित मतदाताओं का भौतिक सत्यापन भी कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
एसडीएम ने दिया जांच का आश्वासन
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने शिकायत पर जांच कराने का भरोसा दिया है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि फॉर्म-7 में दर्ज जानकारी किसी गलती के कारण सामने आई या मतदाताओं के नाम हटाने का सुनियोजित प्रयास किया गया। फिलहाल सभी संबंधित नामों, पते और आवेदन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग तेज हो गई है।