
नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने मंगलवार को फारस की खाड़ी में खार्ग द्वीप के पास पांच ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये सभी टैंकर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े थे। यह कार्रवाई अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर मिसाइल हमले के प्रयास के जवाब में की गई।
ईरानी टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि खार्ग द्वीप के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन जहाजों का संबंध ईरान के IRGC से था। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका पहले ही ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक दबाव बढ़ा चुका है। फारस की खाड़ी और उसके आसपास अमेरिकी सैन्य गतिविधियां बढ़ने से क्षेत्र में तनाव और गहरा गया है।
ईरान ने दी सीधी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के IRGC ने बहरीन और कुवैत के बंदरगाहों के पास मौजूद तेल टैंकरों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित चेतावनी में तेल टैंकरों के चालक दल से तत्काल जहाज छोड़ने की अपील की गई। ईरान ने कहा कि जहाज चाहे लंगर डाले हों या बंदरगाह पर खड़े हों, उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
27 ईरानी एयरलाइंस पर भी प्रतिबंध
इस बीच ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को ईरान के विमानन क्षेत्र पर भी बड़ा कदम उठाया। ईरान की 27 एयरलाइंस और नौ सेवा प्रदाताओं को निशाना बनाते हुए व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं। इससे ईरान पर आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ने की आशंका है।
मिसाइल हमलों के बाद बढ़ा तनाव
यह घटनाक्रम ईरान की ओर से अमेरिकी नौसेना के जहाजों पर हमले के प्रयास और पिछले सप्ताह अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर व डिस्ट्रॉयर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से फायरिंग के बाद सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी जहाजों को नुकसान नहीं पहुंचा था।
छह महीने से अधिक समय से जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीधा टकराव बढ़ता दिख रहा है। खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर पैदा हुआ नया खतरा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी चिंता बढ़ा सकता है।