
जमशेदपुर : झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान जमशेदपुर में बड़ा मामला सामने आया है। जांच में तीन ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं, जिनके अफगानिस्तान के नागरिक होने का संदेह था। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद पासपोर्ट कार्यालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। प्रशासन अब तीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है।
तीनों के नाम मतदाता सूची में दर्ज मिले
जांच में जिन तीन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनकी पहचान मो. इब्राहिम (44 वर्ष), मो. असलम (41 वर्ष) और असिल खान (47 वर्ष) के रूप में हुई है। तीनों के नाम जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 286, हिंदुस्तानी संघ मध्य विद्यालय, गोलमुरी की मतदाता सूची में दर्ज पाए गए।
जानकारी के अनुसार, ये नाम पहले से मतदाता सूची में शामिल थे। इतना ही नहीं, 5 अगस्त 2026 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में भी इनके नाम दर्ज थे। SIR के दौरान दस्तावेजों की जांच शुरू होने के बाद इनके नागरिकता संबंधी दस्तावेजों को लेकर संदेह पैदा हुआ।
पासपोर्ट कार्यालय से कराया गया सत्यापन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन कराने के निर्देश दिए। इसके बाद रांची स्थित पासपोर्ट कार्यालय से तीनों के पासपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी की पुष्टि कराई गई।
पासपोर्ट कार्यालय की जांच में सामने आया कि डेटाबेस के अनुसार संबंधित अफगान नागरिकों के पासपोर्ट से जुड़ी जानकारी मौजूद है और उनके संबंध में पूर्व में शुरू की गई प्रक्रिया रद की जा चुकी है।
फर्जी दस्तावेजों से बनवाया भारतीय पहचान पत्र!
पासपोर्ट कार्यालय से मिली जानकारी के बाद प्रशासन के सामने मामला और गंभीर हो गया। जांच में यह बात सामने आई कि तीनों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय मतदाता पहचान पत्र बनवाया था।
प्रशासन अब पूरे मामले में दस्तावेजों की कड़ियां जोड़ने के साथ यह भी जांच कर रहा है कि इन लोगों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और सत्यापन प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई।
तीनों के खिलाफ FIR की तैयारी
जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपायुक्त के निर्देश पर जालसाजी और नियमों के उल्लंघन के तहत विधिक कार्रवाई की जा रही है।
SIR के दौरान सामने आए इस मामले ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि तीनों के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए और इसके पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका तो नहीं थी।
