
लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर कर दिया है, जबकि छोटे भतीजे ईशान आनंद को सक्रिय राजनीति में उतारते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
ईशान आनंद की राजनीति में औपचारिक एंट्री
ईशान आनंद बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे हैं। कुछ समय पहले मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी के पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने ईशान आनंद को बड़े राजनीतिक मंच से कार्यकर्ताओं के सामने पेश किया। इसे पार्टी की युवा रणनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। मायावती ने ईशान आनंद का आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट भी सार्वजनिक किया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को जानकारी देते हुए बताया कि यह ईशान का आधिकारिक अकाउंट है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य और पार्टी में बढ़ती भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कई राज्यों की मिली संगठनात्मक जिम्मेदारी
बसपा नेतृत्व ने ईशान आनंद को कई राज्यों में संगठन की स्थिति और गतिविधियों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें लगभग 15 से 19 राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया गया है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे चुनावी रूप से महत्वपूर्ण राज्यों को फिलहाल उनके कार्यक्षेत्र से अलग रखा गया है। ईशान संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा करके अपनी रिपोर्ट मायावती और आनंद कुमार को सौंपेंगे। माना जा रहा है कि इस निर्णय के माध्यम से बसपा नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने और दूसरे राज्यों में संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
आकाश आनंद पर मायावती का कड़ा रुख
मायावती ने आकाश आनंद और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। उनके अनुसार, दोनों ने पारिवारिक हितों को पार्टी के हित से ऊपर रखा। मायावती ने कहा कि बसपा का संगठन अनुशासन, समर्पण और निस्वार्थ सेवा के सिद्धांतों पर चलता है तथा इसमें किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता स्वीकार नहीं की जाएगी।उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को देर से उठाया गया कदम बताया। वहीं आकाश आनंद की पार्टी के प्रति भूमिका पर भी सवाल उठाए।
ईशान के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती
ईशान आनंद ने लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है। वह लंबे समय से परिवार से जुड़े कारोबारी और प्रबंधन संबंधी कार्य देख रहे थे। अब सक्रिय राजनीति में आने के बाद उनके सामने पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बढ़ाने और युवाओं को जोड़ने की बड़ी चुनौती होगी।