
काठमांडू : नेपाल में ग्लेशियर पिघलने के बाद आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। अधिकारियों के मुताबिक आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 1377 हो गई है, जबकि 5000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव टीमें मलबे और कीचड़ के बीच लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
5000 से ज्यादा लोग अब भी लापता
आपदा के बाद नेपाल के कई इलाकों में स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार 5130 लोग अभी लापता हैं, जबकि 13,656 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। कई प्रभावित क्षेत्रों में मलबा हटाकर लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
नेपाली कांग्रेस सांसद योगेश गौचन ने सरकार से प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने मंगलवार को मस्तांग जिले में आए भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद की मांग भी उठाई है।
300 घर और स्कूल भी हुए प्रभावित
बाढ़ और भूस्खलन के साथ भूकंप ने भी नुकसान बढ़ाया है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 300 घरों और स्कूलों की इमारतों को नुकसान पहुंचा है। मंगलवार रात काठमांडू से करीब 350 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित मस्तांग जिले में आठ बार भूकंप के झटके महसूस किए गए।
LPG संकट ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
आपदा के बीच नेपाल में एलपीजी गैस की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घरेलू गैस की उपलब्धता प्रभावित होने से खाना पकाने तक का संकट पैदा हो रहा है। इसका असर छात्रों और आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिखाई दे रहा है।
छात्रों का अनोखा विरोध
एलपीजी संकट के विरोध में गुरुवार को छात्रों ने रत्न राज्य लक्ष्मी कैंपस के प्रवेश द्वार पर सड़क पर अस्थायी रसोई बनाकर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। छात्रों ने बर्तन रखकर खाना पकाया। गेट पर चावल और गुंड्रुक-आलू की सब्जी बनाकर करीब 40 लोगों ने साथ बैठकर भोजन किया।
नेपाल इस समय एक साथ प्राकृतिक आपदा, लापता लोगों की तलाश और जरूरी ईंधन की कमी जैसी कई चुनौतियों से जूझ रहा है।