
जमशेदपुर : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान जमशेदपुर में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गोलमुरी थाना क्षेत्र में तीन अफगानी नागरिकों के मतदाता सूची में नाम दर्ज होने की पुष्टि के बाद प्रशासन ने उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। मामला सामने आने के बाद मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
तीन अफगानी नागरिक मतदाता सूची में मिले
मामले में नामजद आरोपियों में मो. इब्राहिम (44 वर्ष), मो. असलम (41 वर्ष) और असिल खान (47 वर्ष) शामिल हैं। जांच में पाया गया कि तीनों के नाम जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 286, मतदान केंद्र हिंदुस्तानी संघ मध्य विद्यालय, गोलमुरी की प्रारूप मतदाता सूची में मतदाता के रूप में दर्ज थे।
प्रशासन के अनुसार, SIR अभियान के दौरान मतदाता सूची में दर्ज नामों और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा था। इसी प्रक्रिया में तीनों नागरिकों के भारतीय नागरिक होने पर सवाल खड़ा हुआ।
पासपोर्ट सत्यापन में सामने आई अफगानी नागरिकता
जांच के दौरान तीनों ने भारत में अपने निवास से जुड़े विभिन्न पहचान दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इनमें वोटर आईडी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस सहित अन्य दस्तावेज शामिल थे।
जब इन दस्तावेजों को चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड कर पासपोर्ट का सत्यापन कराया गया, तो उनके अफगानी नागरिक होने की पुष्टि हुई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में से एक व्यक्ति का पासपोर्ट अफगानी नागरिकता के आधार पर पहले ही रद्द किया जा चुका था।
DC के निर्देश पर बनी विशेष जांच टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन ने धालभूम के अनुमंडल पदाधिकारी अर्णव मिश्रा के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की थी। टीम ने मामले की विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपी।
रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश पर गोलमुरी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। प्रशासन अब इस पूरे मामले में दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
प्रशासन ने लोगों से मांगी सूचना
एसडीओ अर्णव मिश्रा ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके मोहल्ले या आसपास किसी विदेशी नागरिक का वोटर आईडी कार्ड बना होने की जानकारी मिलती है, तो इसकी सूचना तत्काल जिला प्रशासन को दें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमानुसार केवल भारतीय नागरिकों का ही मतदाता पहचान पत्र बनाया जा सकता है। मामले के सामने आने के बाद अब यह भी जांच का विषय है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुए और इसमें कहीं लापरवाही या फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल तो नहीं हुआ।