
नई दिल्ली : हिंदू धार्मिक मान्यताओं और रामकथा के अनुसार हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। उनकी भक्ति, सेवा, साहस और भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण की अनेक कथाएं प्रचलित हैं। इन्हीं में एक कथा माता सीता द्वारा हनुमान जी को दिए गए आशीर्वाद से जुड़ी है। मान्यता है कि लंका में माता सीता की खोज के दौरान हनुमान जी ने जिस निस्वार्थ भाव से प्रभु श्रीराम का संदेश पहुंचाया और माता सीता को भरोसा दिलाया, उससे वह अत्यंत प्रसन्न हुईं। इसी प्रसंग में उन्हें अजर-अमर होने का वरदान मिलने की बात कही जाती है।
हनुमान जी को क्यों मिला अमरता का वरदान?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब रावण माता सीता का हरण कर उन्हें लंका ले गया, तब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को उनकी खोज के लिए भेजा। समुद्र पार कर हनुमान जी लंका पहुंचे और काफी खोजबीन के बाद अशोक वाटिका में माता सीता का पता लगाया। उन्होंने श्रीराम की अंगूठी दिखाकर अपना परिचय दिया और प्रभु का संदेश सुनाया। इससे माता सीता को विश्वास हुआ कि श्रीराम शीघ्र ही उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराने आएंगे।
अशोक वाटिका में हुई भावुक मुलाकात
कथा में बताया गया है कि माता सीता से भेंट के दौरान हनुमान जी ने उन्हें धैर्य बंधाया और भगवान श्रीराम की कुशलता का संदेश दिया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि प्रभु जल्द ही लंका पहुंचेंगे। हनुमान जी की विनम्रता, बुद्धिमत्ता, साहस और श्रीराम के प्रति अटूट भक्ति देखकर माता सीता भावुक हो उठीं।
माता सीता ने दिया यह विशेष आशीर्वाद
प्रचलित रामकथा के अनुसार, माता सीता ने हनुमान जी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे अजर-अमर हों और सदैव सद्गुणों के भंडार बने रहें। इसी प्रसंग को हनुमान जी की अमरता से जोड़ा जाता है। रामचरितमानस के सुंदरकांड में माता सीता के आशीर्वाद से संबंधित चौपाई भी उद्धृत की जाती है।
भक्ति और सेवा का मिला फल
इस कथा का धार्मिक संदेश केवल वरदान तक सीमित नहीं है। हनुमान जी का चरित्र निस्वार्थ सेवा, समर्पण और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने अपने लिए कुछ नहीं मांगा, बल्कि हर कदम पर भगवान श्रीराम के कार्य को सर्वोपरि रखा। माता सीता का आशीर्वाद इसी निष्ठा और सेवा-भाव का सम्मान माना जाता है।
धार्मिक दृष्टि से यह प्रसंग भक्त और भगवान के बीच विश्वास की शक्ति को भी दर्शाता है। इसलिए सुंदरकांड का यह प्रसंग आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। इसी कारण हनुमान जी को आज भी अजर-अमर और संकटमोचन के रूप में श्रद्धा से याद किया जाता है।