लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले मुस्लिम मतदाताओं को एक राजनीतिक मंच पर लाने की कवायद तेज होती दिख रही है। AIMIM, राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल और पीस पार्टी के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। तीनों दल मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मुद्दा बनाकर साथ आने की रणनीति पर काम करते नजर आ रहे हैं।
19.26% मुस्लिम आबादी, लेकिन प्रतिनिधित्व पर सवाल
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी करीब 19.26 प्रतिशत है। इसके बावजूद विधानसभा में मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में 36 मुस्लिम विधायक चुने गए थे। राजनीतिक विश्लेषण में मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाली करीब 130 से 140 सीटों का जिक्र किया जाता है।
सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, संभल के साथ आजमगढ़, मऊ और जौनपुर तक कई सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं।
ओवैसी की पार्टी बढ़ा रही है अपना दायरा
AIMIM मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के मुद्दे को लगातार उठाती रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली का कहना है कि लक्ष्य हिस्सेदारी बढ़ाना है। पार्टी मुस्लिमों के साथ पिछड़े, दलित और अन्य वंचित वर्गों को जोड़ने की रणनीति पर भी जोर दे रही है।
पीस पार्टी और ओलमा काउंसिल का भी रहा चुनावी प्रयोग
डॉ. अयूब की पीस पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और करीब 4.5 प्रतिशत वोट हासिल किए थे। 2012 में पार्टी ने चार विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा और करीब 2.35 प्रतिशत वोट मिले।
वहीं, आमिर रशादी ने अक्टूबर 2008 में राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल का गठन किया था। 2009 के लोकसभा चुनाव में काउंसिल ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा और करीब 2.25 लाख वोट हासिल किए। 2012 में 64 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए काउंसिल को 1,55,527 वोट मिले थे।
अगर गठबंधन हुआ तो बदल सकते हैं कई सीटों के समीकरण
तीनों दलों के संभावित तालमेल को मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए नए मंच के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसका वास्तविक चुनावी असर उम्मीदवारों के चयन, स्थानीय समीकरण, जातीय समीकरण और वोटों के बंटवारे पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक रूप से सबसे अहम सवाल यही है कि क्या AIMIM, पीस पार्टी और ओलमा काउंसिल साथ आकर यूपी में मुस्लिम वोटों को एकजुट कर पाएंगे? अगर ऐसा हुआ तो पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक कई विधानसभा सीटों पर चुनावी मुकाबले का समीकरण बदल सकता है।



