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अब गांव में एक ही छत के नीचे मिलेगी हर दवा! झारखंड में ‘अबुआ दवाखाना’ की बड़ी पहल, 745 केंद्रों से बदलेगा इलाज का तरीका - aksharsamvad.com
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रांची : ग्रामीण क्षेत्रों में अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं के लिए लोगों को अब इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। झारखंड सरकार ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ‘अबुआ दवाखाना’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत एक ही स्थान पर एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धति की आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

पहले चरण में 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में खुलेगा केंद्र

स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से जारी संकल्प के अनुसार, योजना के पहले चरण में राज्य के 745 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) में एकीकृत दवा केंद्र खोले जाएंगे। इसमें धनबाद के चयनित आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी शामिल होंगे।

इन केंद्रों पर झारखंड आवश्यक औषधि सूची के तहत एलोपैथिक दवाएं और राष्ट्रीय आयुष आवश्यक दवा सूची के तहत विभिन्न आयुष पद्धतियों की दवाएं रखी जाएंगी। इन दवाओं का वितरण लाभार्थियों को मुफ्त किया जाएगा।

एक ही केंद्र पर पांच चिकित्सा पद्धतियों की दवा

‘अबुआ दवाखाना’ का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रामीण लोगों को दवा के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की परेशानी से बचाना है। केंद्र पर एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों की जरूरी दवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ मरीजों के समय और आने-जाने के खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

डिजिटल सिस्टम बताएगा दवा का स्टॉक

योजना में दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। केंद्रों में कंप्यूटर, प्रिंटर और इंटरनेट की सुविधा होगी। दवाओं की उपलब्धता तथा स्टॉक की जानकारी डिजिटल सिस्टम में रियल टाइम दर्ज की जाएगी।

इससे अधिकारियों को दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक प्रबंधन की निगरानी करने में मदद मिलेगी और दवाओं की कमी की स्थिति पर समय रहते कार्रवाई की जा सकेगी।

जिला और प्रखंड स्तर पर होगी निगरानी

‘अबुआ दवाखाना’ के संचालन के लिए जिला और प्रखंड स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी। जिला समिति दवाओं की सूची, केंद्र की स्थापना और नियमित समीक्षा करेगी। वहीं प्रखंड समिति संबंधित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में केंद्र के लिए कमरे के चयन और निरीक्षण का काम करेगी।

केंद्र का संचालन वहां कार्यरत योग प्रशिक्षक करेंगे, जबकि निगरानी आयुष चिकित्सक या सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) करेंगे।

हर केंद्र पर पांच लाख रुपये खर्च करेगी सरकार

सरकार प्रत्येक ‘अबुआ दवाखाना’ की आधारभूत संरचना के लिए पांच लाख रुपये उपलब्ध कराएगी। इसमें पेंटिंग, फ्लोरिंग और फिक्सिंग के लिए दो लाख रुपये, ब्रांडिंग व साइनबोर्ड के लिए 60 हजार रुपये, कंप्यूटर-प्रिंटर-इंटरनेट के लिए 80 हजार रुपये, दवा रैक व अलमारी के लिए 1.05 लाख रुपये, रेफ्रिजरेटर के लिए 25 हजार रुपये और पावर बैकअप के लिए 30 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

केंद्र का संचालन करने वाले योग प्रशिक्षक को हर माह तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार की इस पहल से ग्रामीण इलाकों में अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की जरूरी दवाओं को एक ही जगह उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।

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