
जमशेदपुर/चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम की लाल मिट्टी से निकलकर राष्ट्रीय औद्योगिक पटल पर अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले रूंगटा बंधुओं ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रूंगटा माइंस लिमिटेड के नंदलाल रूंगटा और मुकुंद रूंगटा पहली बार फॉर्च्यून इंडिया की देश के शीर्ष 100 धनकुबेरों की सूची में शामिल हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रूंगटा बंधुओं की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 40 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है और सूची में उन्हें 61वें पायदान पर रखा गया है।
लाल मिट्टी से राष्ट्रीय कारोबारी पहचान तक
चाईबासा की खनिज संपदा और लौह अयस्क के कारोबार से अपनी मजबूत पहचान बनाने वाला रूंगटा परिवार अब देश के बड़े कारोबारी घरानों की कतार में नजर आ रहा है। दशकों से लौह अयस्क और खनन कारोबार में सक्रिय इस परिवार की सफलता को झारखंड के कारोबारी इतिहास में अहम पड़ाव माना जा रहा है।
फॉर्च्यून इंडिया की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी और अडाणी समूह के गौतम अडाणी जैसे दिग्गजों के साथ रूंगटा बंधुओं का नाम आना चाईबासा और पश्चिमी सिंहभूम के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
40 हजार करोड़ की संपत्ति, सूची में 61वां स्थान
रिपोर्ट के मुताबिक, नंदलाल और मुकुंद रूंगटा की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 40,000 करोड़ रुपये है। इसी संपत्ति के आधार पर उन्हें देश के शीर्ष 100 अमीरों की सूची में 61वां स्थान मिला है। वहीं सूची में रूंगटा बंधुओं ने करीब 67 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल दर्ज किया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि रूंगटा परिवार लंबे समय से खनन और लौह-इस्पात कारोबार में सक्रिय रहा है और अब उसका कारोबार पारंपरिक खनन से आगे बढ़कर वैल्यू-एडेड स्टील उत्पादों तक पहुंच चुका है।
वेदांता से सीधी कारोबारी टक्कर
खनन क्षेत्र में रूंगटा समूह की प्रतिस्पर्धा अब बड़े कॉरपोरेट समूहों से भी दिखाई देती है। रिपोर्ट में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के साथ रूंगटा परिवार की कारोबारी प्रतिस्पर्धा का उल्लेख किया गया है। प्राकृतिक संसाधनों वाले राज्यों में लौह अयस्क खदानों की नीलामी के दौरान दोनों समूहों के बीच सीधी और कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती रही है।
खनन से स्टील उत्पादन तक बढ़ा कारोबार
रूंगटा साम्राज्य की नींव 1962 में एसआर रूंगटा ने रखी थी। शुरुआत में कारोबार लौह अयस्क और मैंगनीज खनन तक सीमित था। उनके निधन के बाद नंदलाल और मुकुंद रूंगटा ने कारोबार की कमान संभाली। बाद में सिद्धार्थ रूंगटा के जुड़ने के साथ रूंगटा स्टील ब्रांड ने भी विस्तार किया।
आज समूह झारखंड के चिलियामा और ओडिशा के कमांडा में आधुनिक संयंत्रों के जरिए पेलेट्स, स्पंज आयरन और टीएमटी बार जैसे उत्पादों का निर्माण कर रहा है। क्षेत्रीय माइनिंग कंपनी से इंटीग्रेटेड स्टील कारोबारी समूह बनने का यह सफर अब रूंगटा परिवार को देश के शीर्ष धनकुबेरों की सूची तक पहुंचा चुका है।