
जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नरसंहार मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बुधवार को 10 दोषी माओवादियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 24 में से सात धाराओं में दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया। अन्य धाराओं में दोषियों को जुर्माना समेत अलग-अलग सजाएं भी दी गई हैं।
25 मई 2013 को परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान माओवादियों ने हमला किया था। हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोगों की मौत हो गई थी। घटना में 38 लोग घायल भी हुए थे।
101 गवाहों के बयान बने सुनवाई का अहम आधार
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने 10 आरोपितों को दोषी माना। इसके बाद सात धाराओं में उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया।
हाईकोर्ट की पुष्टि के बिना लागू नहीं होगी फांसी
अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत्युदंड की सजा को लागू करने से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। दोषियों को फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। सभी 10 दोषी फिलहाल जगदलपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।
कई बड़े नेताओं की गई थी जान
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल रहा है। एक ही हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था। घटना के बाद इसकी जांच और दोषियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया लंबे समय तक चली।
अब विशेष अदालत के फैसले के बाद मामला अगले कानूनी चरण में पहुंच गया है। मृत्युदंड पर अंतिम अमल हाईकोर्ट की पुष्टि और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।