
- हादसे के बाद घायल कर्मचारी को 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाने का लक्ष्य, गोल्डन आवर्स में इलाज शुरू कराने पर जोर
जमशेदपुर : टाटा स्टील के प्लांट में अब किसी कर्मचारी के साथ गंभीर हादसा होने पर मेडिकल रिस्पांस को और तेज करने की तैयारी है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही एक फोन पर मेडिकल, सिक्योरिटी और एडमिन टीम एक्टिव होगी और प्लांट से टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) तक घायल कर्मचारी को पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य हादसे के बाद घायल को 10 मिनट के भीतर TMH पहुंचाना है।
एक कॉल पर शुरू होगी पूरी प्रक्रिया
कंपनी परिसर स्थित स्टीलनियम सभागार में बुधवार शाम ‘सेविंग लाइफ इन इंडस्ट्रियल ट्रॉमा’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें TMH के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. शिशिर कुमार ने औद्योगिक दुर्घटनाओं में तत्काल मेडिकल रिस्पांस की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्लांट में किसी भी तरह की गंभीर दुर्घटना होने पर चीफ सुपरवाइजर TMH के रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (RMO) को फोन करेंगे। सूचना मिलते ही टाटा स्टील और TMH की सिक्योरिटी व एडमिन टीम को सक्रिय किया जाएगा। इसके बाद एंबुलेंस के लिए रास्ता तैयार कर घायल को जल्द अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू होगी।
ऊंचाई से गिरने, गैस और आग जैसी घटनाओं पर भी फोकस
प्रस्तावित व्यवस्था में विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों को शामिल किया गया है। ऊंचाई से गिरने, गैस लगने, जलने और हार्ट अटैक जैसी स्थिति में तत्काल सूचना और मेडिकल सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य एंबुलेंस को प्लांट से TMH तक पहुंचने में लगने वाले समय को कम करना है, ताकि हादसे के बाद शुरुआती महत्वपूर्ण समय में उपचार शुरू किया जा सके।
साथी कर्मचारी भी देंगे शुरुआती मेडिकल मदद
कार्यशाला में कर्मचारियों की भूमिका पर भी जोर दिया गया। बताया गया कि यदि कोई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल होता है तो आसपास मौजूद सहकर्मी उसकी पल्स जांच कर सकते हैं। सांस नहीं आने की स्थिति में तत्काल CPR देने और प्लांट मेडिकल टीम को सूचना देने की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया।
इस तरह अस्पताल पहुंचने से पहले ही घायल को शुरुआती जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराने की तैयारी है।
भूमिगत माइंस में सबसे बड़ी चुनौती
कार्यक्रम के दौरान टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदर रामम ने पहल की सराहना की। साथ ही उन्होंने भूमिगत माइंस में मेडिकल रिस्पांस की चुनौती का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्र में ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था संभव है, लेकिन भूमिगत माइंस, जामाडोबा और जोड़ा जैसे क्षेत्रों में कर्मचारी के घायल होने पर उसे पहले खदान से बाहर निकालना पड़ता है। ऐसे मामलों में गोल्डन आवर्स के भीतर अस्पताल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
माइंस के बाहर विकसित होगी लाइफ सपोर्ट सर्विस
भूमिगत माइंस की चुनौती को देखते हुए माइंस के बाहर ही लाइफ सपोर्ट सर्विस विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य अस्पताल ले जाने से पहले घायल कर्मचारी को जरूरी मेडिकल सपोर्ट देना है, जिससे उसकी स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिल सके।
कार्यशाला में टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम, टाटा वर्क्स यूनियन के अध्यक्ष संजीव चौधरी, डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह समेत विभिन्न विभागों के चीफ, हेड और कमेटी सदस्य मौजूद थे।
10 मिनट में TMH पहुंचाने का लक्ष्य
पूरी पहल में सबसे अहम लक्ष्य रेस्क्यू से लेकर अस्पताल तक पहुंचने के समय को कम करना है। हादसे की सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी, मेडिकल टीम, सिक्योरिटी और एडमिन सिस्टम को सक्रिय करेंगे। इसके बाद एंबुलेंस के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार कर घायल कर्मचारी को 10 मिनट के भीतर TMH पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।