
नई दिल्ली : कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर जरूरत से अधिक निर्भरता कितनी खतरनाक साबित हो सकती है, इसका एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिकी समाचार चैनल CNN की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया व्यवस्था में इस्तेमाल किए गए एक AI चैटबॉट ने चीनी जहाज पर रखे उपकरण की गलत पहचान कर दी। इस सूचना के आधार पर अमेरिकी सेना कथित तौर पर कार्रवाई की तैयारी तक पहुंच गई थी। हालांकि, अंतिम समय में अधिकारियों द्वारा दोबारा जांच किए जाने के बाद जानकारी गलत पाई गई और एक संभावित सैन्य टकराव टल गया।
चीनी जहाज पर संदिग्ध उपकरण होने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच अमेरिकी अधिकारियों को समुद्र में मौजूद एक चीनी जहाज के बारे में सूचना मिली थी। AI आधारित विश्लेषण में दावा किया गया कि जहाज पर परमाणु हथियार कार्यक्रम से संबंधित संवेदनशील सामग्री ले जाई जा रही है। इसे गंभीर खतरा मानते हुए अमेरिकी कमांडो को जहाज पर कार्रवाई के लिए तैयार किया गया और लड़ाकू विमानों को भी सतर्क रहने को कहा गया।
अंतिम जांच में सामने आई AI की गलती
किसी सैन्य कार्रवाई से पहले एक अमेरिकी विश्लेषक ने जहाज के मैनिफेस्ट यानी माल-सूची की दोबारा जांच की। इस दौरान पता चला कि AI चैटबॉट ने जहाज पर दर्ज सामग्री की पहचान गलत तरीके से की थी। रिपोर्ट में दिए गए सूत्रों के मुताबिक, चैटबॉट ने खुली स्रोत वाली जानकारी के साथ कथित गोपनीय आंकड़ों को मिलाकर ऐसा निष्कर्ष तैयार किया, जो विश्वसनीय खुफिया रिपोर्ट जैसा दिखाई दे रहा था।समय रहते मानवीय जांच नहीं होती तो इस गलत सूचना के कारण अमेरिका और चीन के बीच गंभीर तनाव पैदा हो सकता था। यह स्पष्ट नहीं है कि इस विश्लेषण के लिए किस AI प्रणाली का इस्तेमाल किया गया था।
सैन्य क्षेत्र में AI के इस्तेमाल पर सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया की कई सेनाएं नेविगेशन, निगरानी, लक्ष्य पहचान और नियंत्रण प्रणालियों में AI का उपयोग बढ़ा रही हैं। हाल में यमन स्थित एक हथियार इंजीनियरिंग समूह द्वारा मिसाइल और निर्देशित रॉकेट के लिए AI आधारित सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने का दावा भी चर्चा में रहा है। विशेषज्ञों की चिंता है कि AI कभी-कभी अधूरी या गलत जानकारी को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत कर सकता है। सैन्य मामलों में ऐसी एक गलती भी व्यापक संकट का कारण बन सकती है।
वैश्विक नियम बनाने की बढ़ी जरूरत
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं सैन्य AI के लिए स्पष्ट मानक, मानवीय निगरानी और जवाबदेही तय करने पर विचार कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संवेदनशील निर्णय में AI की सूचना को अंतिम सत्य मानने के बजाय प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए।