
चाईबासा : कोल्हान विश्वविद्यालय की डिग्री अब डिजिटल सुरक्षा कवच से लैस होगी। विश्वविद्यालय के डिग्री प्रमाणपत्र को नए स्वरूप में जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। 45वीं अकादमिक काउंसिल की बैठक में डिग्री प्रमाणपत्र के नए प्रारूप को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रमाणपत्र ए4 फॉर्मेट में जारी किया जाएगा। इसमें क्यूआर कोड और बारकोड समेत कुल 11 सुरक्षा विशेषताएं होंगी। इससे प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता की जांच और डिजिटल सत्यापन आसान होगा।
झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी एक्ट, 2026 के प्रावधानों के तहत पुनर्गठित अकादमिक काउंसिल की यह पहली बैठक शनिवार को विश्वविद्यालय में हुई। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. अंजिला गुप्ता ने की। कुलसचिव डॉ. अमर कुमार ने बैठक का संचालन किया, जबकि डीन अकादमिक्स डॉ. संजय यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
क्यूआर कोड से आसान होगा प्रमाणपत्र का सत्यापन
नए प्रारूप वाले प्रमाणपत्र में क्यूआर कोड के जरिए विद्यार्थी अपने प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी का डिजिटल सत्यापन करा सकेंगे। नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य संस्थानों में दस्तावेज सत्यापन के दौरान इससे प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रमाणपत्र अपलोड करने और उसकी प्रामाणिकता जांचने में भी सुविधा मिलेगी।
क्यूआर कोड और बारकोड के साथ प्रमाणपत्र में कुल 11 सुरक्षा फीचर शामिल किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य प्रमाणपत्र की सुरक्षा बढ़ाने के साथ उसके दुरुपयोग और जालसाजी की आशंका को कम करना है।
रोजगारपरक शिक्षा पर भी जोर
अकादमिक काउंसिल की बैठक में डिग्री प्रमाणपत्र के अलावा विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। पाठ्यक्रम को वर्तमान समय की जरूरतों और उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को नए कौशल से लैस करने तथा शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी चर्चा हुई, ताकि विद्यार्थियों को स्थानीय के साथ राष्ट्रीय स्तर के रोजगार अवसरों के लिए तैयार किया जा सके।
एक वर्षीय पीजी और पीएचडी पर भी मंथन
बैठक में एक वर्षीय पीजी कार्यक्रम, शोध एवं पीएचडी पाठ्यक्रमों को नियमित करने सहित कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। सत्र को समयबद्ध और नियमित करने के उद्देश्य से शैक्षणिक कैलेंडर 2026-27 को भी स्वीकृति दी गई।
आईआईटी-एनआईटी के साथ एमओयू की तैयारी
विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों से जोड़ने के लिए आईआईटी, एनआईटी और अन्य संस्थानों के साथ एमओयू की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके माध्यम से शोध, प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और अकादमिक साझेदारी के अवसर बढ़ाने की योजना है।
बैठक में आईआईटी खड़गपुर के प्रो. संजीव श्रीवास्तव, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एमपी सिन्हा, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के प्रो. भगवान सिंह, ट्रिपल आईटी रांची के निदेशक प्रो. राजीव श्रीवास्तव और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने सुझाव दिए। प्रो. राजीव श्रीवास्तव और प्रो. गौतम सूत्रधार ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।