
नई दिल्ली : दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची के सत्यापन ने बड़ा रूप ले लिया है। चुनाव अधिकारियों के अनुसार अब तक 31,63,930 मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें कई चर्चित राजनीतिक, प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े नाम भी शामिल हैं।
आडवाणी, बांसुरी स्वराज और कई बड़े नाम नोटिस सूची में
SIR के दौरान पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, राज्यसभा सांसद बांसुरी स्वराज, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई प्रमुख नामों को नोटिस जारी होने की जानकारी सामने आई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी समेत अन्य प्रमुख लोगों के नाम भी नोटिस सूची में बताए गए हैं।
नोटिस जारी होने के पीछे अलग-अलग कारण बताए गए हैं। इनमें पुराने SIR रिकॉर्ड से नाम का मैप नहीं होना और नाम, जन्मतिथि अथवा अन्य विवरण में लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी शामिल है।
दिवंगत अर्थशास्त्री बिबेक देबरॉय का नाम भी सामने आया
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अलग मामला दिवंगत अर्थशास्त्री एवं प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व अध्यक्ष बिबेक देबरॉय का है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में निधन के बावजूद उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज मिला और सत्यापन के लिए नोटिस जारी हुआ।
यह मामला मतदाता रिकॉर्ड को अपडेट करने की प्रक्रिया और पुराने रिकॉर्ड की सटीकता को लेकर सवाल खड़े करता है।
केजरीवाल परिवार को भी नोटिस
पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके परिवार के चार अन्य सदस्यों को भी ‘Unmapped with Last SIR’ श्रेणी में नोटिस दिए गए हैं। इस श्रेणी का मतलब है कि मौजूदा विवरण पिछली SIR की मतदाता सूची से मैप नहीं हो पाया।
नोटिस मिला तो नाम कट गया, ऐसा नहीं
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होना मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के बराबर नहीं है। संबंधित मतदाता को अपना जवाब और जरूरी दस्तावेज जमा करने का मौका दिया जा रहा है। सत्यापन के बाद पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं।
30 सितंबर तक दावे-आपत्तियों का मौका
SIR के दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलनी है। इसके बाद सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने पर दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित किए जाने का कार्यक्रम है।
अब SIR पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई
SIR प्रक्रिया में नोटिस पाने वाले करीब 33 लाख मतदाताओं के नाम और नोटिस के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को सुनवाई प्रस्तावित है।
यानी दिल्ली की SIR में मामला सिर्फ बड़े नेताओं और चर्चित नामों तक सीमित नहीं है-लाखों मतदाताओं के रिकॉर्ड का सत्यापन चल रहा है और नोटिस पाने वालों को दस्तावेज देकर अपना रिकॉर्ड स्पष्ट करने का अवसर दिया जा रहा है।