
नई दिल्ली : शारदीय नवरात्र की तैयारियों के बीच इस बार मां दुर्गा की सवारी चर्चा में है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र जिस दिन शुरू होता है, उसके आधार पर देवी के आगमन का वाहन बताया जाता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र का आरंभ रविवार, 11 अक्टूबर को होगा। इसी वजह से इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। भक्त इसे शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।
दिन के अनुसार बदलती है आगमन की सवारी
मां दुर्गा को सामान्यतः सिंह पर विराजमान दिखाया जाता है, लेकिन नवरात्र में उनके आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग वाहनों की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता के मुताबिक रविवार या सोमवार को नवरात्र शुरू होने पर देवी हाथी पर आती हैं। शनिवार या मंगलवार को शुरुआत हो तो घोड़ा, बुधवार को नौका और गुरुवार या शुक्रवार को डोली या पालकी का उल्लेख किया जाता है। इसी परंपरा के आधार पर इस साल देवी के हाथी पर आगमन की बात कही जा रही है। हालांकि सिंह मां दुर्गा का प्रसिद्ध वाहन है; नवरात्र के आगमन की सवारी का उल्लेख एक अलग धार्मिक मान्यता के रूप में होता है।
हाथी की सवारी का क्या है अर्थ?
भारतीय परंपरा में हाथी को शक्ति, स्थिरता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। नवरात्र में देवी के हाथी पर आने को अच्छी वर्षा और उन्नति की आशा से जोड़कर देखा जाता है। कई श्रद्धालु इसे खेती और खुशहाली के लिए मंगलकारी संकेत मानते हैं। ये आस्था से जुड़ी व्याख्याएं हैं, मौसम या भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
प्रस्थान की सवारी भी होती है अलग
मान्यता के अनुसार, देवी की विदाई का वाहन नवरात्र समाप्त होने वाले दिन से तय किया जाता है। इसलिए आगमन और प्रस्थान की सवारी एक जैसी होना जरूरी नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में इन परंपराओं की व्याख्या में कुछ अंतर भी मिल सकता है। नवरात्र के नौ दिनों में श्रद्धालु देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, उपवास और आरती करते हैं। घरों और पूजा पंडालों में तैयारियां शुरू होते ही मां के आगमन को लेकर उत्साह बढ़ जाता है। इस बार हाथी की सवारी से जुड़ी मान्यता भी उसी उत्साह का हिस्सा है। भक्तों के लिए यह पर्व शक्ति की आराधना के साथ जीवन में सकारात्मकता और मंगल की कामना करने का अवसर है।