
रांची/गिरिडीह : झारखंड की सियासत में दिवंगत मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के बाद उनके परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सुदिव्य सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा को हेमंत सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की अटकलें सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में 26 सितंबर के बाद संभावित शपथ की चर्चा की गई है, हालांकि सरकार या झामुमो की ओर से श्वेता शर्मा को मंत्री बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा अब तक नहीं हुई है।
26 सितंबर के बाद क्या बदल सकता है?
मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर चर्चा के बीच 25 सितंबर को कैबिनेट बैठक प्रस्तावित बताई गई है। इसके बाद मंत्रिमंडल में रिक्त पदों को लेकर तस्वीर साफ होने की संभावना जताई जा रही है। श्वेता शर्मा के नाम को इसी राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुदिव्य सोनू के निधन से खाली हुआ मंत्री पद
झारखंड सरकार में मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 6 सितंबर 2026 को हृदयाघात के बाद निधन हो गया था। उनके निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट भी रिक्त हुई है।
सोनू के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झामुमो के कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने बड़े भाई के समान बताया था। 17 सितंबर को गिरिडीह में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन परिवार के साथ मौजूद रहे।
मंत्री पद के साथ गिरिडीह उपचुनाव पर भी नजर
सुदिव्य सोनू के निधन के बाद गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। ऐसे में श्वेता शर्मा का नाम सामने आने को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज हुई है। हालांकि उपचुनाव में उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम पर भी अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सुदिव्य के विभाग फिलहाल मुख्यमंत्री के पास
सुदिव्य कुमार के निधन के बाद उनके विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आवंटित किए गए हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के दौरान रिक्त जिम्मेदारियों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
पारिवारिक राजनीतिक विरासत का सवाल
झारखंड की राजनीति में दिवंगत नेताओं के परिवार के सदस्यों को आगे लाने के उदाहरण पहले भी सामने आए हैं। इसी पृष्ठभूमि में सुदिव्य सोनू के बाद परिवार से किसी सदस्य की सक्रिय राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
फिलहाल श्वेता शर्मा के मंत्री बनने की खबर को आधिकारिक निर्णय नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में कैबिनेट बैठक और पार्टी स्तर पर होने वाली गतिविधियों से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।