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चांडिल डैम 181 RL पार! 30 से ज्यादा गांवों के खेत जलमग्न, पकने से पहले डूब गई धान की फसल•टाटा वर्कर्स यूनियन के कर्मचारियों को 17.5% बोनस, 28 कर्मियों के खाते में जाएंगे ₹13.60 लाख•मानगो गुरुनानक स्कूल में देशभक्ति का रंग, कवियों की प्रस्तुति पर तालियों से गूंजा पूरा हॉल•कैमरे के पीछे की खामोश आवाज थमी, वरिष्ठ प्रेस छायाकार पार्थो चक्रवर्ती का निधन•स्कूल से मिला आत्मनिर्भरता का मंत्र, नौकरी मांगने नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा•दरवाजे पर खड़ा ट्रैक्टर-ट्रॉली रातोंरात चोरी, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात; लेस्लीगंज में मचा हड़कंप•जमशेदपुर में दिनदहाड़े बैंक डकैती, गन प्वाइंट पर मैनेजर से खुलवाया चेस्ट; 42 लाख से ज्यादा नकद और जेवर लूटकर फरार•कोडरमा उपायुक्त के नाम पर बनी फर्जी फेसबुक ID, प्रशासन ने जारी किया साइबर अलर्ट•एशियन गेम्स में भारत की शानदार शुरुआत, रोशिबिना ने जीता रजत, रोइंग में सतनाम-सलमान को कांस्य•डैम का पानी और हाथियों का आतंक, दोहरी मार में रसुनिया के किसान; दूध भर रही धान की फसल बर्बादचांडिल डैम 181 RL पार! 30 से ज्यादा गांवों के खेत जलमग्न, पकने से पहले डूब गई धान की फसल•टाटा वर्कर्स यूनियन के कर्मचारियों को 17.5% बोनस, 28 कर्मियों के खाते में जाएंगे ₹13.60 लाख•मानगो गुरुनानक स्कूल में देशभक्ति का रंग, कवियों की प्रस्तुति पर तालियों से गूंजा पूरा हॉल•कैमरे के पीछे की खामोश आवाज थमी, वरिष्ठ प्रेस छायाकार पार्थो चक्रवर्ती का निधन•स्कूल से मिला आत्मनिर्भरता का मंत्र, नौकरी मांगने नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा•दरवाजे पर खड़ा ट्रैक्टर-ट्रॉली रातोंरात चोरी, CCTV में कैद हुई पूरी वारदात; लेस्लीगंज में मचा हड़कंप•जमशेदपुर में दिनदहाड़े बैंक डकैती, गन प्वाइंट पर मैनेजर से खुलवाया चेस्ट; 42 लाख से ज्यादा नकद और जेवर लूटकर फरार•कोडरमा उपायुक्त के नाम पर बनी फर्जी फेसबुक ID, प्रशासन ने जारी किया साइबर अलर्ट•एशियन गेम्स में भारत की शानदार शुरुआत, रोशिबिना ने जीता रजत, रोइंग में सतनाम-सलमान को कांस्य•डैम का पानी और हाथियों का आतंक, दोहरी मार में रसुनिया के किसान; दूध भर रही धान की फसल बर्बाद
चांडिल डैम 181 RL पार! 30 से ज्यादा गांवों के खेत जलमग्न, पकने से पहले डूब गई धान की फसल - aksharsamvad.com
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सरायकेला: दो दिनों से लगातार हो रही बारिश और सुवर्णरेखा परियोजना से पानी छोड़े जाने के बाद चांडिल डैम का जलस्तर बुधवार शाम चार बजे 181 RL मीटर के पार पहुंच गया। जलस्तर बढ़ने के साथ ही डूब क्षेत्र के 30 से अधिक गांवों के निचले इलाकों में पानी घुस गया है। सैकड़ों एकड़ खेत जलमग्न हो गए हैं और धान की फसल पर संकट गहरा गया है।

चार प्रखंडों के दर्जनों गांव प्रभावित

कुकड़ू, नीमडीह, चांडिल और ईचागढ़ प्रखंड के कई गांवों के खेतों में कमर भर पानी जमा होने की बात सामने आई है। इनमें बांदाबीर, केंदाआन्दा, आदारडीह, चौका, कारकीडीह, चानो-चोराटखाल, हुटू, आंडा, तिलाईटांड़, कल्याणपुर, लावा, सीमा, रसुनिया, हाथीनादा, रूयानी, पियालडीह, बोराबिंदा, केशरगड़िया, डिमुडीह, दियाडीह, रुगड़ी, खोकरो, मैसाढ़ा, गाराडीह, मातकमडीह, लोपसोडीह, छोटा आमड़ा, हुटुप, ईचागढ़, पातकुम और हुरलूंग समेत अन्य गांव शामिल हैं।

दूध भरने और पकने की अवस्था में थी धान की फसल

प्रभावित किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कई खेतों में धान की फसल अब दूध भरने और पकने की अवस्था में पहुंच चुकी थी। खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहा तो फसल के सड़ने और पूरी मेहनत बर्बाद होने का खतरा है। किसानों का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विस्थापित अधिकार मंच ने उठाए सवाल

विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल परियोजना के लिए विस्थापितों ने अपनी जमीन, घर और भविष्य तक कुर्बान किया। इसके बावजूद आज इसी परियोजना के कारण उनकी फसल डूबने की स्थिति में है।

उन्होंने अधिकारियों से संपर्क नहीं हो पाने का भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि किसान खेतों में पानी घुसने की शिकायत लेकर मुख्य अभियंता और कार्यपालक अभियंता से संपर्क करना चाहते हैं, लेकिन संपर्क नहीं हो पा रहा है।

‘परियोजना की सफलता का पैमाना विस्थापितों की सुरक्षा भी हो’

राकेश रंजन महतो ने कहा कि एक ओर चांडिल परियोजना को उपलब्धियों के लिए पुरस्कार मिलते हैं, वहीं दूसरी ओर परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के खेतों में पानी भर रहा है। उन्होंने सरकार से परियोजना की सफलता का आकलन विस्थापितों की फसल, पुनर्वास और आजीविका की सुरक्षा के आधार पर भी करने की मांग की।

किसानों ने मांगा तत्काल मुआवजा

प्रभावित किसानों में आक्रोश है। उनका आरोप है कि बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने से पहले उन्हें पर्याप्त सूचना नहीं मिलती और खेत डूबने के बाद नुकसान का समय पर सर्वे भी नहीं हो पाता।

विस्थापित अधिकार मंच ने मांग की है कि-

  • तत्काल जलस्तर का प्रबंधन कर खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था हो।
  • डूबे खेतों का तत्काल सर्वे कर फसल क्षति का मुआवजा दिया जाए।
  • भविष्य में जलस्तर बढ़ाने से पहले किसानों को अनिवार्य सूचना देने की व्यवस्था बनाई जाए।

समय रहते कदम नहीं उठा तो बढ़ेगा नुकसान

विस्थापित अधिकार मंच ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया और पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो किसानों की तैयार फसल को भारी नुकसान हो सकता है। अब प्रभावित किसानों की नजर प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर है।

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