
जमशेदपुर : लगातार हो रही बारिश ने जमशेदपुर और आसपास के नदी तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा दिया है। स्वर्णरेखा और खरकई नदियां खतरे के निशान को पार कर उफान पर हैं। पानी तेजी से रिहायशी क्षेत्रों में फैल रहा है। बागबेड़ा, कदमा, शंकोसाई और आदित्यपुर के कई इलाकों में 500 से अधिक घर प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई परिवारों ने छतों पर रात बिताई, जबकि कुछ लोगों ने जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों और पड़ोसियों के घरों में शरण ली।
खतरे के निशान से 2.70 मीटर ऊपर खरकई
मानगो में स्वर्णरेखा नदी का खतरे का स्तर 121.50 मीटर निर्धारित है, जबकि शुक्रवार को इसका जलस्तर 122.22 मीटर दर्ज किया गया। इस तरह नदी खतरे के निशान से 72 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। आदित्यपुर में खरकई नदी का जलस्तर 131.70 मीटर पहुंच गया, जबकि यहां खतरे का स्तर 129 मीटर है। यानी खरकई नदी 2.70 मीटर ऊपर बह रही है।
तीसरी बार निचले इलाकों में बिगड़े हालात
बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से शहर के निचले इलाकों में तीसरी बार हालात गंभीर हुए हैं। बागबेड़ा, कदमा और शंकोसाई के घरों में पानी प्रवेश कर गया है। साकची, जुगसलाई और कदमा की कई सड़कों पर जलभराव होने से यातायात भी प्रभावित रहा। पानी के कारण कई कार और मोटरसाइकिलें बीच रास्ते में बंद हो गईं। लोगों को वाहनों को धक्का देकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना पड़ा।
चांडिल डैम के सभी 13 गेट खुले
जलस्तर नियंत्रित करने के लिए चांडिल डैम के सभी 13 रेडियल गेट खोल दिए गए हैं। इनमें आठ गेट दो-दो मीटर और पांच गेट आधा-आधा मीटर तक खोले गए। डैम का जलस्तर शाम को 180.95 मीटर दर्ज हुआ, जबकि सुबह यह 181.05 मीटर तक पहुंच गया था। डैम से करीब 1829.99 क्यूमेक पानी छोड़ा जा रहा है।
आदित्यपुर की बस्तियों में भी संकट
आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के कल्पनापुरी में कई घरों में बारिश और नदी का पानी घुस गया। राम मड़ैया तथा सालडीह बस्ती में भी लोगों को जलभराव की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
अगले 24 घंटे बेहद अहम
मौसम विभाग ने 26 सितंबर को झारखंड के अधिकतर हिस्सों में बारिश की संभावना जताई है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज, वज्रपात और तेज हवाएं चल सकती हैं। बीते 24 घंटे में सरायकेला-खरसावां में 94.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। अगले 24 घंटे नदियों के किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।