
रांची : झारखंड के बोकारो जिले के भंडरो गांव की तस्वीर एक इंजीनियर की सोच और मेहनत ने पूरी तरह बदल दी है। महानगरों में करीब दस वर्षों तक नौकरी करने के बाद इंजीनियर दयामय महतो अपने गांव लौटे और उसे डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने का संकल्प लिया। उनकी पहल के बाद आज गांव के अलग-अलग हिस्सों में Wi‑Fi उपलब्ध है, सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और विद्यार्थियों को ई-लाइब्रेरी में मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण मिल रहा है।
गांव के हर कोने तक पहुंचा इंटरनेट
भंडरो गांव में पहले इंटरनेट की सुविधा सीमित थी। विद्यार्थियों और ग्रामीणों को ऑनलाइन पढ़ाई तथा दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ता था। दयामय महतो ने गांव में अपना Wi‑Fi नेटवर्क तैयार कर इस समस्या का समाधान किया। अब करीब 60 छात्र-छात्राएं मोबाइल और कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं, 100 से अधिक ग्रामीण भी इस नेटवर्क से जुड़कर देश-दुनिया की जानकारियां हासिल कर रहे हैं।
करीब 30 CCTV कैमरों से निगरानी
डिजिटल सुविधाओं के साथ गांव की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। प्रारंभिक व्यवस्था के तहत गांव के प्रमुख स्थानों और चप्पे-चप्पे पर करीब 30 CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों की सहायता से गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कैमरे लगने के बाद उनमें सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।
घर में बनाई ई-लाइब्रेरी, प्रशिक्षण भी मुफ्त
गांव के बच्चों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए दयामय महतो ने अपने आवास पर ही दस कंप्यूटरों वाला प्रशिक्षण केंद्र और ई-लाइब्रेरी स्थापित की है। यहां विद्यार्थियों को मुफ्त कंप्यूटर प्रशिक्षण के साथ पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। इसका उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना और तकनीक के उपयोग में सक्षम बनाना है।
महानगरों का अनुभव गांव के काम आया
दयामय महतो ने गांव लौटने से पहले बेंगलुरु और मुंबई की विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों में लगभग दस वर्षों तक काम किया। फिलहाल वह चास-बोकारो क्षेत्र में इंटरनेट ब्रॉडबैंड सेवा देने वाली कंपनी के निदेशक हैं। गांव में Wi‑Fi उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने स्वयं की कंपनी भी स्थापित की है।
दूसरे गांवों तक मॉडल पहुंचाने की तैयारी
इस अनूठी पहल की जानकारी मिलने पर पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो और डॉ. लंबोदर महतो ने गांव पहुंचकर नेटवर्क व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने इसे ग्रामीण झारखंड के लिए प्रेरक मॉडल बताया। भविष्य में इस सेवा को अन्य इलाकों तक पहुंचाने और युवाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार के अवसर तैयार करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।