
सरायकेला : चांडिल डैम में नौकाविहार करने वाले पर्यटकों की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF ने एक दिवसीय बोटमैन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सरायकेला-चांडिल और जमशेदपुर क्षेत्र के कुल 40 नाविक शामिल हुए। प्रशिक्षण में नाविकों को जल दुर्घटना के समय बचाव करने, पीड़ित को शुरुआती सहायता देने और मेडिकल टीम तक सुरक्षित पहुंचाने से जुड़े महत्वपूर्ण कौशल सिखाए गए। बिहटा, पटना स्थित NDRF की 9वीं बटालियन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम कमांडेंट हितेंद्र पाल सिंह कंडारी के दिशा-निर्देशन में सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक चला। इसका मुख्य उद्देश्य नाविकों की आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाना और जलाशय में पर्यटकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना था।
पानी में बचाव की तकनीकों से कराया परिचित
प्रशिक्षण के दौरान नाविकों को ड्राई और वेट रेस्क्यू की तकनीकों की जानकारी दी गई। जल बचाव के इन तरीकों के साथ पानी में प्रवेश करने की विधि भी प्रशिक्षण का हिस्सा रही। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के संकट में होने पर बचाव की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना कितना आवश्यक है। नाविकों का काम केवल नाव संचालन तक सीमित नहीं रहता। जलाशय में किसी अप्रिय घटना के दौरान वे पीड़ित के सबसे करीब मौजूद हो सकते हैं। इसी भूमिका को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में बचाव से लेकर शुरुआती देखभाल तक के विषय शामिल किए गए।
CPR और प्राथमिक सहायता पर विशेष जोर
कार्यक्रम में बेसिक लाइफ सपोर्ट यानी BLS और CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। पानी से निकाले गए पीड़ित की स्थिति संभालने, कैजुअल्टी मैनेजमेंट और अस्पताल पहुंचने से पहले दी जाने वाली सहायता के बारे में भी नाविकों को जानकारी मिली। इन सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को आपात स्थिति में अपनी जिम्मेदारी समझाना था। बचाव के बाद पीड़ित की देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इसलिए प्रशिक्षण में जल से बाहर निकालने के साथ आगे की सहायता प्रक्रिया पर भी ध्यान दिया गया।
सर्पदंश से मेडिकल टीम को सौंपने तक की जानकारी
जल बचाव के अलावा सर्पदंश की स्थिति में प्राथमिक उपचार का विषय भी कार्यक्रम में शामिल रहा। नाविकों को पीड़ित को मेडिकल टीम के सुपुर्द करने की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि बचाव और चिकित्सकीय सहायता के बीच समन्वय बेहतर हो सके। प्रशिक्षण में इन अलग-अलग विषयों को शामिल कर आपात सहायता की पूरी प्रक्रिया से प्रतिभागियों को परिचित कराया गया।
प्रमाण-पत्र देकर बढ़ाया नाविकों का उत्साह
प्रशिक्षण समाप्त होने पर कमांडेंट हितेंद्र पाल सिंह कंडारी ने नाविकों से बातचीत की। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र और टी-शर्ट वितरित किए। यह पहल चांडिल डैम में सुरक्षित नौकाविहार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशिक्षण से स्थानीय नाविकों की बचाव संबंधी समझ और तैयारी बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे संकट के समय पर्यटकों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।