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गांधी जयंती पर चांडिल में सत्य-अहिंसा के लिए उपवास, काटिया में चार दिन से तनाव; 6 तक समाधान नहीं तो 7 को धरना - aksharsamvad.com
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सरायकेला : महात्मा गांधी की जयंती पर गुरुवार को चांडिल नौका विहार परिसर में चांडिल डैम विस्थापितों ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए एक दिवसीय उपवास किया। विस्थापित मुक्ति वाहिनी एवं विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित उपवास के जरिए वर्षों पुरानी भूमि और पुनर्वास संबंधी समस्याओं के शांतिपूर्ण एवं न्यायपूर्ण समाधान की मांग उठाई गई।

गांधी जयंती पर सत्य-अहिंसा का संदेश

उपवास के दौरान विस्थापित संगठनों ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा, शांति और सद्भाव के जरिए संघर्ष का रास्ता दिखाया था। उसी मार्ग पर चलते हुए विस्थापित परिवार अपनी भूमि और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं। संगठनों ने प्रशासन से संवाद के जरिए समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की अपील की।

काटिया पुनर्वास स्थल पर चार दिनों से तनाव

इधर, चांडिल प्रखंड की रूदिया पंचायत स्थित काटिया पुनर्वास स्थल पर पिछले चार दिनों से तनाव की स्थिति बनी होने का दावा विस्थापित संगठनों ने किया है। संगठनों का आरोप है कि विस्थापित परिवारों को तालाब में स्नान करने, रास्ते से आवागमन करने तथा खुले मैदान में गाय-बकरी चराने से रोका जा रहा है।

इसके अलावा विस्थापितों के प्लॉट में लगे पेड़ों को काटे जाने की बात भी संगठनों की ओर से कही गई है। मामले को लेकर क्षेत्र में विवाद की स्थिति बनी हुई है।

एसडीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर दोनों संगठनों ने चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी सह विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, सुवर्णरेखा परियोजना को लिखित आवेदन सौंपा है। आवेदन के माध्यम से काटिया पुनर्वास स्थल की स्थिति का तत्काल स्थल निरीक्षण कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

संगठनों ने शेष 0.725 एकड़ भूमि समेत पूरे पुनर्वास स्थल की वास्तविक स्थिति की जांच कराने तथा विस्थापित परिवारों के आवागमन, दैनिक उपयोग और पुनर्वास भूमि से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है।

6 अक्टूबर तक समाधान का अल्टीमेटम

विस्थापित संगठनों ने प्रशासन को 6 अक्टूबर तक समस्या का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया है। आवेदन में कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 7 अक्टूबर 2026 को पुनर्वास कार्यालय के समक्ष एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना दिया जाएगा।

संगठनों ने स्पष्ट किया कि विस्थापित अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं। उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि प्रशासन के साथ संवाद के माध्यम से भूमि एवं पुनर्वास संबंधी समस्याओं का न्यायपूर्ण समाधान हासिल करना है।

एक ही संदेश-सत्य और अहिंसा से समाधान

उपवास कार्यक्रम के माध्यम से विस्थापित संगठनों ने संदेश दिया कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए विस्थापितों के अधिकार एवं भूमि संबंधी समस्याओं का शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम में नारायण गोप, राकेश रंजन महतो, अंबिका यादव, श्यामल मार्डी, अक्लू धीवर, कार्तिक महतो, दामन बास्के, जगन्नाथ किस्कू, बिरबल प्रमाणिक, लखन माझी, सूरज मुर्मू, देवेन महतो, विजय टुडू, ठाकुरदास गोप, ईश्वर गोप, भागीरथ लायक, राजीव महतो, वैधनाथ महतो, उपवन गोप, मुखिया कुनाराम माझी तथा कुनाराम सोरेन (मास्टर) समेत बड़ी संख्या में विस्थापित मौजूद रहे।

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