
जमशेदपुर : विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों की लंबित मांगों को लेकर संगठनात्मक एकजुटता बढ़ी है। झारखंड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ को झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने औपचारिक संबद्धता प्रदान की है। इस फैसले के साथ विश्वविद्यालय कर्मियों की सेवा संबंधी समस्याओं को राज्यस्तरीय मंच पर उठाने की पहल की गई है। साकची स्थित यक्ष्मा कार्यालय के सभागार में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों महासंघों के प्रतिनिधियों ने संबद्धता की घोषणा की। पदाधिकारियों ने बताया कि नियमित, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगों को साझा मंच के माध्यम से मजबूती दी जाएगी।
साझा मंच से मजबूत होगी कर्मचारियों की आवाज
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री बीरेंद्र यादव और विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री विश्वम्भर यादव ने कहा कि नई संबद्धता कर्मचारियों के मुद्दों को व्यापक स्तर पर सामने लाने में मदद करेगी। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत कर्मियों की समस्याएं अब राज्यव्यापी कर्मचारी आंदोलन का हिस्सा बनेंगी। प्रतिनिधियों ने नियमित कर्मचारियों के सेवा लाभों के साथ संविदा तथा आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता से उठाने की बात कही। संगठन का प्रयास इन विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारियों की मांगों को एकजुट होकर आगे बढ़ाना है।
पदों के पुनर्गठन के साथ समायोजन की मांग
विश्वम्भर यादव ने बताया कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में पदों की पुनर्संरचना की है। उन्होंने मांग रखी कि इस प्रक्रिया में वर्षों से कार्यरत योग्य और अनुभवी संविदा कर्मचारियों के समायोजन की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही पात्र नियमित कर्मचारियों की प्रोन्नति के लिए भी व्यवस्थित प्रावधान की जरूरत बताई गई। महासंघ ने पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट सेक्शन के अनुभवी कर्मचारियों को स्वीकृत पदों के विरुद्ध समायोजित करने का मुद्दा उठाया। पदों के पुनर्गठन और कार्यरत कर्मियों के भविष्य से जुड़ी मांगों को संगठन ने अपने एजेंडे में शामिल किया है।
एसीपी-एमएसीपी और मानदेय पर जोर
कोल्हान विश्वविद्यालय तथा जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में लंबित एसीपी/एमएसीपी मामलों का जल्द निष्पादन प्रमुख मांगों में शामिल है। संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय का पारदर्शी पुनरीक्षण तथा वैधानिक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी रखी गई। तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थायीकरण की विशेष नीति बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा रिक्त नियमित पदों पर पारदर्शी बहाली और कार्यरत योग्य कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की मांग की गई।
12 दिसंबर को दिल्ली में उठेंगे मुद्दे
महासंघ ने घोषणा की कि दस सूत्री मांगों को लेकर आगामी 12 दिसंबर को दिल्ली में व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा। इसके माध्यम से लंबित सेवा संबंधी मामलों और कर्मचारियों के अधिकारों की ओर ध्यान आकर्षित किया जाएगा। प्रेसवार्ता में शर्मिला ठाकुर, रवींद्र नाथ ठाकुर, तुषार बनर्जी और संत कुमार झा सहित कई पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।