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महिलाओं की डाइट में पपीता, फायदे जानें, पीरियड्स से जुड़े दावों का सच भी समझें - aksharsamvad.com
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पपीता संतुलित आहार में पोषण बढ़ा सकता है, लेकिन अनियमित पीरियड्स का इलाज नहीं है।

नई दिल्ली : पपीता केवल स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि रोजमर्रा के भोजन में पोषण बढ़ाने का आसान विकल्प भी है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, बीटा-कैरोटीन और पानी मौजूद होते हैं। महिलाओं के लिए यह संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, पपीता खाने से हार्मोन संतुलित होने, पीरियड्स समय पर आने या हर तरह की पेट की परेशानी दूर होने जैसे दावों को पक्के इलाज की तरह मानना सही नहीं है।

पाचन को सहारा, कब्ज में मिल सकती है मदद

पपीते का फाइबर भोजन में रेशे की मात्रा बढ़ाता है। पर्याप्त पानी और दूसरे फाइबरयुक्त खाद्य पदार्थों के साथ इसका सेवन कब्ज से बचाव में मदद कर सकता है। लेकिन इसे खाने के बाद गैस या पेट फूलने की समस्या कभी नहीं होगी, ऐसा कहना गलत होगा। फाइबर अचानक ज्यादा लेने से कुछ लोगों को उलटे गैस और ऐंठन हो सकती है। इसलिए अपनी सहनशीलता के अनुसार मात्रा रखें।

आयरन के अवशोषण में उपयोगी विटामिन सी

महिलाओं में आयरन की कमी एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या है। पपीते में मौजूद विटामिन सी, दालों, बीन्स और हरी सब्जियों जैसे पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में मदद कर सकता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पपीता अकेले खून की कमी दूर कर देगा। एनीमिया होने पर उसकी वजह समझना, जरूरी जाँच और निर्धारित उपचार लेना भी आवश्यक है।

पीरियड्स नियमित करने का भरोसेमंद उपचार नहीं

पपीता खाकर पीरियड्स लाने या मासिक चक्र नियमित करने पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अनियमित पीरियड्स के पीछे तनाव, वजन में बदलाव, गर्भावस्था, पीसीओएस या थायराइड जैसी वजहें हो सकती हैं। समस्या का उपचार उसके कारण के अनुसार होता है। बार-बार चक्र बिगड़ने, लगातार तीन बार पीरियड्स छूटने या साथ में अन्य लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। केवल खानपान बदलकर जाँच टालना उचित नहीं है।

खाने के लिए घड़ी से ज्यादा जरूरी संतुलन

पपीते को नाश्ते के साथ या दिन में किसी सुविधाजनक समय खाया जा सकता है। हर महिला के लिए सुबह 10 से 12 बजे का समय अनिवार्य बताना या 100 ग्राम को सार्वभौमिक अधिकतम सीमा मानना उचित नहीं है। ताजा, अच्छी तरह पका और साफ फल चुनें। इसे भोजन की जगह रखने के बजाय विविध आहार में शामिल करें।

गर्भावस्था में कच्चे पपीते को लेकर सावधानी

पके और कच्चे पपीते में फर्क समझना जरूरी है। कच्चे या अधपके पपीते के लेटेक्स से जुड़े प्रयोगों में गर्भाशय के संकुचन देखे गए हैं, लेकिन ये पशु और प्रयोगशाला अध्ययन हैं; मनुष्यों में जोखिम की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। गर्भावस्था में कच्चे या अधपके पपीते से बचना और आहार संबंधी सलाह लेना समझदारी है। इसे पीरियड्स लाने के घरेलू उपाय की तरह इस्तेमाल न करें।

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