
- केंद्र की आपत्तियों का विस्तृत जवाब परिवेश पोर्टल पर अपलोड; पुरानी हवाई पट्टी का होगा पुनर्विकास, नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं
जमशेदपुर : धालभूमगढ़ में प्रस्तावित एयरपोर्ट को लेकर लंबे समय से चली आ रही पर्यावरणीय और प्रशासनिक अड़चनें अब दूर होती दिख रही हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से उठायी गयी 19 बिंदुओं की आपत्तियों का विस्तृत और संशोधित निराकरण प्रतिवेदन तैयार कर परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इसके बाद परियोजना को अंतिम स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलने की उम्मीद बढ़ गयी है।
पुरानी हवाई पट्टी का होगा पुनर्विकास
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि धालभूमगढ़ में किसी नये ग्रीनफील्ड क्षेत्र में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विकसित की गयी पुरानी और अब परित्यक्त हवाई पट्टी का ही पुनर्विकास किया जाना है। यानी मौजूदा हवाई सुविधा को विकसित कर एयरपोर्ट के रूप में उपयोग करने की योजना है।
99.256 हेक्टेयर वन भूमि से जुड़ा मामला
प्रस्तावित परियोजना के लिए 99.256 हेक्टेयर वन भूमि का मामला है। इसके एवज में 198.512 हेक्टेयर अवकृष्ट भूमि पर क्षतिपूरक वनरोपण किया जाएगा। यानी प्रभावित वन भूमि के दोगुने क्षेत्र में क्षतिपूरक पौधरोपण का प्रस्ताव रखा गया है।
79,332 पेड़ और बांस का ब्योरा
परियोजना क्षेत्र में कुल 79,332 पेड़ और बांस दर्ज किये गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें अधिकांश छोटे व्यास यानी 10 से 30 सेंटीमीटर वाले हैं। पेड़ों और वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर केंद्र की आपत्तियों के जवाब में संशोधित रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी दी गयी है।
कॉस्ट-बेनीफिट रेशियो भी बदला
परियोजना के आर्थिक लाभ और पर्यावरणीय लागत का पुनर्मूल्यांकन किया गया है। संशोधित रिपोर्ट में कॉस्ट-बेनीफिट रेशियो 1:48.6 निर्धारित किया गया है। बिजली और पानी की लाइनें मौजूदा राइट ऑफ वे से ही लाने की बात कही गयी है। इससे अतिरिक्त वन भूमि लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हाथी कॉरिडोर पर भी दिया गया जवाब
केंद्रीय मंत्रालय ने सिंहभूम एलिफेंट रिजर्व और आसपास के हाथी कॉरिडोर पर संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाये थे। जवाब में बताया गया है कि घाटशिला-काकड़ाझोर हाथी कॉरिडोर प्रस्तावित स्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर है।
मुसाबनी-चाकुलिया हाथी कॉरिडोर की दूरी करीब 13 किलोमीटर और डुमरिया-कुंदलुका-मुरकानजिया कॉरिडोर की दूरी करीब 17 किलोमीटर बतायी गयी है।
बनेगा साइट-स्पेसिफिक वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान
वन्यजीवों की सुरक्षा और आवास विखंडन के संभावित प्रभाव को कम करने के लिए परियोजना एजेंसी अपने खर्च पर विस्तृत साइट-स्पेसिफिक वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान तैयार करेगी। रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों में परियोजना क्षेत्र के आसपास मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को सीमित बताया गया है।
अब अंतिम स्टेज-1 क्लियरेंस पर नजर
केंद्र की 19 आपत्तियों का जवाब अपलोड होने के बाद अब केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लियरेंस का इंतजार है। यह मंजूरी मिलने के बाद धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के पुनर्विकास की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
कोल्हान के लिए क्यों अहम है एयरपोर्ट?
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट को जमशेदपुर और पूरे कोल्हान की हवाई कनेक्टिविटी के लिहाज से महत्वपूर्ण परियोजना माना जाता है। लंबे समय से प्रस्तावित इस एयरपोर्ट की राह में पर्यावरणीय मंजूरी प्रमुख बाधाओं में रही है। अब 19 आपत्तियों के जवाब सामने आने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया पर क्षेत्र के लोगों की नजर है।
मुख्य आंकड़े एक नजर में
- प्रस्तावित वन भूमि : 99.256 हेक्टेयर
- क्षतिपूरक वनरोपण : 198.512 हेक्टेयर
- पेड़ व बांस : 79,332
- केंद्र की आपत्तियां : 19
- कॉस्ट-बेनीफिट रेशियो : 1:48.6
- घाटशिला-काकड़ाझोर कॉरिडोर : करीब 15 किमी
- मुसाबनी-चाकुलिया कॉरिडोर : करीब 13 किमी
- डुमरिया-कुंदलुका-मुरकानजिया कॉरिडोर : करीब 17 किमी
- प्रस्ताव : द्वितीय विश्व युद्ध की पुरानी हवाई पट्टी का पुनर्विकास
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