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बचपन पर ऑफलाइन और ऑनलाइन खतरे, सुरक्षा के लिए एकजुट होने की पुकार - aksharsamvad.com
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जमशेदपुर में जिला स्तरीय ‘संवाद’ के दौरान बाल संरक्षण की चुनौतियों और समाधान पर विचार रखते वक्ता व उपस्थित प्रतिनिधि।

जमशेदपुर :  बाल मजदूरी और कम उम्र में विवाह से लेकर ऑनलाइन ब्लैकमेल तक, बच्चों के सामने मौजूद खतरों से निपटने के लिए साझा प्रयास जरूरी हैं। साकची स्थित होटल कैनेलाइट में मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय ‘संवाद’ में बच्चों की सुरक्षा को परिवार, स्कूल, प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि संरक्षण की रणनीति बनाते समय बच्चों की आवाज और उनके अनुभवों को भी जगह मिलनी चाहिए। आदर्श सेवा संस्थान और रूरल डेवलपमेंट एसोसिएशन के संयुक्त आयोजन में प्रशासनिक, पुलिस, न्यायिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. निर्मला शुक्ला ने की और संचालन एम. अरविन्दा ने किया।

डांट से ज्यादा जरूरी भरोसे का रिश्ता

विशेष किशोर पुलिस इकाई के मनोज कुमार ने बच्चों के साथ कठोर व्यवहार के बजाय बातचीत को प्राथमिकता देने की बात कही। शिक्षक अरविन्द तिवारी ने बताया कि बच्चे कई बार शिक्षकों से ऐसी परेशानियां साझा करते हैं, जिन्हें घर में बताने से झिझकते हैं। इसलिए विद्यालयों में संवेदनशील और सहयोगी माहौल जरूरी है। TdH Suisse के आशीष घोष ने शिक्षा, सुरक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बच्चों का दृष्टिकोण समझने पर जोर दिया। विकास दोदराजका ने कहा कि योजनाओं के बावजूद अनेक बच्चे शोषण, बाल विवाह, मजदूरी और नशे जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

मोबाइल की दुनिया में भी सुरक्षा की जरूरत

साइबर थाना प्रभारी श्रीनिवास प्रसाद ने साइबर बुलिंग, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल, ब्लैकमेल और ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े जोखिम गिनाए। उन्होंने बताया कि निजी जानकारी साझा करने से बच्चे मुश्किल में पड़ सकते हैं, जबकि परिवार को इसकी जानकारी अक्सर देर से मिलती है। अभिभावकों से दोस्ताना संबंध रखने और बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहने की अपील की गई।

पंचायतों तक पहुंचे संरक्षण का तंत्र

इंडियन यूथ काउंसिल के सदस्यों ने गांव और पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समितियां बनाने की मांग उठाई। छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, 16 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण और बाल सुधार गृह से बाहर आने वालों के पुनर्वास संबंधी मांगपत्र जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी को सौंपा गया। RDA के सुजॉय भट्टाचार्य ने ग्रामीण बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुकूल वातावरण के लिए संस्था के प्रयासों की जानकारी दी।

पहचान की गोपनीयता और कानूनी सहायता पर जोर

जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी प्रेम प्रकाश ने जिले को बच्चों के अनुकूल बनाने में सभी विभागों की भूमिका बताई। पैनल में बच्चों के सर्वोत्तम हित, कौशल विकास और निःशुल्क कानूनी सहायता पर चर्चा हुई। पत्रकार विकास श्रीवास्तव ने संवेदनशील रिपोर्टिंग और बच्चों की पहचान गोपनीय रखने की जरूरत रेखांकित की।

युवाओं ने सुझाए जागरूकता के रास्ते

युवा प्रतिभागियों ने पुस्तकालय, खेल, प्रतियोगिता कक्षाएं और बाल संगठनों को मजबूत करने का सुझाव दिया। नुक्कड़ नाटक, रैली और वॉल पेंटिंग के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की बात भी उठी। उषा महतो ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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