
- बिंदल मॉल फायरिंग में पांच अपराधी गिरफ्तार, दो शूटर भी पुलिस की गिरफ्त में; हथियार, गोलियां और बाइक बरामद
जमशेदपुर : सोनारी के मरीन ड्राइव स्थित बिंदल मॉल के उडुपी रेस्टोरेंट में 26 सितंबर को हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना के पीछे बड़ी आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है। जमशेदपुर पुलिस ने मामले में दो मुख्य शूटर समेत पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, डोमनिक की हत्या के लिए पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ था और शूटरों को घटना से पहले 25 हजार रुपये एडवांस भी दिए गए थे।
गिरफ्तार आरोपितों में मोहन यादव, अजीत मंडल, अविनाश ठाकुर, रूपेश सिंह और ओम सिंह उर्फ ओम बच्चा शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से घटना में इस्तेमाल तीन हथियार, छह गोलियां, बाइक, मोबाइल फोन और राउटर बरामद किया है।
एसएसपी डॉ एहतेशाम वकारिब ने बुधवार को एसएसपी कार्यालय के सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूरे मामले की जानकारी दी। मौके पर सिटी एसपी ललित मीना, सोनारी थाना प्रभारी संजय सुमन और बिष्टुपुर थाना प्रभारी निरंजन कुमार भी मौजूद थे।
पांच लाख में हुआ था हत्या का सौदा
पुलिस जांच में सामने आया है कि जमीन की खरीद-बिक्री और रेलवे में ठेकेदारी को लेकर मनोज सरकार और दीपू ओझा का डोमनिक के साथ लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस के मुताबिक, विवाद बढ़ने के बाद डोमनिक को रास्ते से हटाने की योजना तैयार की गयी।
इसी योजना के तहत डोमनिक की हत्या की सुपारी पांच लाख रुपये में तय की गयी थी। शूटरों को काम शुरू करने से पहले 25 हजार रुपये दे दिये गये थे, जबकि शेष रकम हत्या के बाद देने की बात तय थी।
15 दिन तक शूटरों ने की रेकी
पुलिस के अनुसार, घटना को अंजाम देने से पहले शूटरों ने करीब 15 दिनों तक डोमनिक की गतिविधियों पर नजर रखी। 26 सितंबर को भी रेस्टोरेंट में हमला करने से पहले उसकी रेकी की गयी थी।
इसके बाद अजीत मंडल और अविनाश ठाकुर रेस्टोरेंट के अंदर पहुंचे और डोमनिक तथा उसके साथ मौजूद लोगों पर गोलियां चला दीं।
बाइक से पहुंचे थे शूटर, हमले के बाद ठिकाना मिला
एसएसपी के अनुसार, फायरिंग के दौरान डोमनिक, मो. रिजवान, मो. दिलशाद और कृष्णा चौधरी घायल हुए थे। वारदात के बाद मौके से निकलने में शूटरों की मदद मोहन यादव ने की। वह बाइक चला रहा था।
हमले के बाद रूपेश सिंह और ओम सिंह उर्फ ओम बच्चा ने आरोपितों को छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया। पुलिस के मुताबिक, हथियार की व्यवस्था करने में भी इनकी भूमिका रही। पुलिस ने ओम प्रकाश के पास से बाइक भी बरामद की है।
चार साजिशकर्ता पहले ही भेजे जा चुके हैं जेल
एसएसपी ने बताया कि फायरिंग के बाद मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित की गयी थी। जांच के दौरान पुलिस ने इस साजिश में शामिल मनोज सरकार, टीटी शर्मा, दीपू ओझा और शंकर मुंडा को गिरफ्तार कर पहले ही जेल भेज दिया था।
इनसे पूछताछ के दौरान पुलिस को शूटरों और वारदात में शामिल अन्य अपराधियों के संबंध में अहम जानकारी मिली।
डोबो के पास बस से उतरते ही दबोचे गये
पुलिस को मंगलवार रात सूचना मिली कि अजीत मंडल और मोहन यादव बस से डोबो के पास उतरने वाले हैं। दूसरी ओर ओम सिंह और रूपेश सिंह उनके इंतजार में हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने इलाके में घेराबंदी की और पांचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।
अब रिमांड पर लेकर होगी गहन पूछताछ
गिरफ्तार आरोपितों में अजीत मंडल का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में आठ मामले दर्ज हैं, जबकि मोहन यादव के खिलाफ तीन मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। अविनाश ठाकुर और रूपेश सिंह के खिलाफ भी पूर्व में मामले दर्ज हैं।
पुलिस अब पांचों आरोपितों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है। रिमांड के दौरान हत्या की साजिश, हथियारों की उपलब्धता, सुपारी की रकम और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की जायेगी।