ताजा खबर
हेमंत सोरेन ने निभाई मां रूपी सोरेन के श्राद्ध की पारंपरिक रस्म, नेमरा में परिवार संग किया संस्कार•गोलमुरी बैंक डकैती: फरार पांच आरोपितों पर 10 लाख का इनाम, बिहार-बंगाल तक पुलिस की छापेमारी•जमशेदपुर में 89 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले, 2500 बच्चों को नहीं मिला पोषाहार•AI नहीं छीन सकता लेखक की कलम! जमशेदपुर के ‘छाप 3.0’ में साहित्यकारों ने बताई किताबों की ताकत•जमशेदपुर में दो युवकों की आत्महत्या से सनसनी, एक के मामले में पारिवारिक विवाद का आरोप तो दूसरा तलाश रहा था रोजगार•जमशेदपुर में लगा झारखंड का पहला ग्रेन ATM, अंगूठा लगाते ही मिलेगा गेहूं-चावल; बिचौलियों का खेल होगा खत्म!•20 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप, जमशेदपुर लाकर पान मसाला फैक्ट्री मालिक को भेजा जेल•हेमंत सोरेन की मां के निधन पर शोक जताने नेमरा पहुंचे केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, कई जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि•पंडालों तक पहुंचे डीसी–एसएसपी, सुरक्षित दर्शन के लिए रास्तों से बिजली तक की जांच•NH-33 पर रॉन्ग साइड का कहर! बस-ट्रैक्टर में जोरदार टक्कर, दो यात्री घायलहेमंत सोरेन ने निभाई मां रूपी सोरेन के श्राद्ध की पारंपरिक रस्म, नेमरा में परिवार संग किया संस्कार•गोलमुरी बैंक डकैती: फरार पांच आरोपितों पर 10 लाख का इनाम, बिहार-बंगाल तक पुलिस की छापेमारी•जमशेदपुर में 89 आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले, 2500 बच्चों को नहीं मिला पोषाहार•AI नहीं छीन सकता लेखक की कलम! जमशेदपुर के ‘छाप 3.0’ में साहित्यकारों ने बताई किताबों की ताकत•जमशेदपुर में दो युवकों की आत्महत्या से सनसनी, एक के मामले में पारिवारिक विवाद का आरोप तो दूसरा तलाश रहा था रोजगार•जमशेदपुर में लगा झारखंड का पहला ग्रेन ATM, अंगूठा लगाते ही मिलेगा गेहूं-चावल; बिचौलियों का खेल होगा खत्म!•20 करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप, जमशेदपुर लाकर पान मसाला फैक्ट्री मालिक को भेजा जेल•हेमंत सोरेन की मां के निधन पर शोक जताने नेमरा पहुंचे केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, कई जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि•पंडालों तक पहुंचे डीसी–एसएसपी, सुरक्षित दर्शन के लिए रास्तों से बिजली तक की जांच•NH-33 पर रॉन्ग साइड का कहर! बस-ट्रैक्टर में जोरदार टक्कर, दो यात्री घायल
AI नहीं छीन सकता लेखक की कलम! जमशेदपुर के ‘छाप 3.0’ में साहित्यकारों ने बताई किताबों की ताकत - aksharsamvad.com
Spread the love

  • के. वनजा बोलीं-कोई तकनीक लेखक का अस्तित्व खत्म नहीं कर सकती; बैजनाथ मिश्रा ने कहा-एआई वही लौटाता है, जो मनुष्य पहले दे चुका है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संताली फिल्म ‘आँगेन’ की हुई विशेष स्क्रीनिंग।

जमशेदपुर : क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भविष्य में लेखकों की जगह ले लेगा? क्या डिजिटल दुनिया किताबों की खुशबू और पन्नों को पलटने का सुख छीन सकती है? इन सवालों पर जमशेदपुर में आयोजित साहित्यिक महाकुंभ ‘छाप 3.0’ में साहित्यकारों और विशेषज्ञों ने खुलकर अपनी राय रखी। वक्ताओं का स्पष्ट संदेश था कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, मानवीय संवेदना, जीवन के अनुभव और रचनात्मकता का विकल्प नहीं बन सकती।

साहित्य कला फाउंडेशन की ओर से शुक्रवार को बिष्टुपुर स्थित होटल अल्कोर में दो दिवसीय साहित्यिक आयोजन का भव्य शुभारंभ हुआ। पहले दिन साहित्य, एआई, पत्रकारिता, आदिवासी साहित्य, सिनेमा और इतिहास जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आए साहित्यकारों, पत्रकारों और विशेषज्ञों ने बदलते समय में किताबों की प्रासंगिकता पर विचार साझा किए।

किताबों की खुशबू और स्पर्श की जगह नहीं ले सकती तकनीक

‘एआई के दौर में किताबों का भविष्य’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में केरल के कोच्चि से आईं प्रो. के. वनजा ने कहा कि कोई भी तकनीक लेखक के अस्तित्व को समाप्त नहीं कर सकती। इसलिए एआई से डरने की जरूरत नहीं है। किताबों को छूने, उनके पन्ने पलटने और उनकी गंध महसूस करने का अपना अलग अनुभव है। डिजिटल स्क्रीन या एआई इस अनुभूति की पूरी तरह बराबरी नहीं कर सकते।

आलोचक राकेश बिहारी ने कहा कि एआई ने लोगों को संदेह से भर दिया है। अब लोग अपने लिखे पर भी शक करने लगे हैं। हालांकि, मनुष्य जिस तरह जीवन को महसूस करता है और अनुभवों को शब्द देता है, उसे एआई उसी रूप में महसूस नहीं कर सकता।

‘एआई जेनरेटर, मनुष्य क्रिएटर’

झारखंड के पूर्व सूचना आयुक्त बैजनाथ मिश्रा ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि एआई जेनरेटर है, जबकि मनुष्य क्रिएटर है। एआई हमें वही देता या लौटाता है, जो मनुष्य पहले दे चुका है। यह टिप्पणी साहित्य में मानवीय मौलिकता और तकनीक की भूमिका पर चल रही बहस के केंद्र में रही।

कथाकार पंकज मित्र ने तकनीक के प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा कि मानव इतिहास में पहली बार ऐसी तकनीक आई है, जिसने मानव मस्तिष्क को चुरा लिया है। परिचर्चा में इस बात पर मंथन हुआ कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच लेखक की स्वतंत्र सोच, मौलिकता और साहित्यिक संवेदना को कैसे बचाए रखा जाए।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संताली फिल्म ‘आँगेन’ की स्क्रीनिंग

‘छाप 3.0’ में साहित्य के साथ सिनेमा का रंग भी देखने को मिला। निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित संताली फिल्म ‘आँगेन’ की विशेष स्क्रीनिंग की गई। फिल्म प्रदर्शन के बाद फिल्म विशेषज्ञ डॉ. विजय शर्मा ने संताली सिनेमा और फिल्मकार रवि की सृजन यात्रा पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर डॉ. विजय शर्मा की पुस्तक ‘नोबेल साहित्य व सिनेमा’ के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया गया।

आदिवासी साहित्य में स्त्री की आवाज पर चर्चा

आयोजन के एक अन्य सत्र में पद्मश्री दमयंती बेसरा और साहित्यकार निर्मला पुतुल ने आदिवासी साहित्य में स्त्री की भूमिका पर विचार साझा किए। भादो माझी ने परिचर्चा का संचालन किया। चर्चा में आदिवासी साहित्य की दुनिया में महिलाओं की भागीदारी और उनकी अभिव्यक्ति के महत्व को सामने रखा गया।

वहीं, लेखक और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी प्रशांत आनंद की पुस्तक ‘राजकौशल’ पर मुन्ना कुमार पांडेय ने उनसे संवाद किया। पुस्तक में 19 भारतीय राजाओं की कहानियां शामिल हैं।

एआई के दौर में खबरों पर कितना भरोसा?

पत्रकारिता के सामने उभरती चुनौतियों पर भी ‘छाप 3.0’ में गंभीर चर्चा हुई। ‘एआई युग में खबरें : विश्वसनीयता के संकट’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में हिंदुस्तान के संपादक गणेश मेहता, दैनिक भास्कर के संपादक कुमार भवानंद, दैनिक जागरण के संपादक प्रदीप सिंह और चमकता आईना के संपादक जयप्रकाश राय ने भाग लिया। संवाद का संचालन उदितवाणी के संपादक उदित अग्रवाल ने किया।

चर्चा का केंद्र एआई के दौर में समाचारों की विश्वसनीयता, सूचनाओं की प्रामाणिकता और पत्रकारिता के समक्ष खड़ी नई चुनौतियां रहीं।

उपन्यास से किस्सागोई तक, साहित्य के कई रंग

लेखक एवं फिल्मकार विमलचंद्र पांडेय की पुस्तक ‘गुलअब्बास’ पर रश्मि शर्मा ने उनसे बातचीत की। वहीं, यात्रा-वृत्तांत ‘गल्प-बेहयाई के 72 दिन’ के लेखक प्रमोद सिंह से काशी विद्यापीठ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अविनाश कुमार सिंह ने संवाद किया।

पहले दिन का समापन हिमांशु बाजपेई की किस्सागोई से हुआ। उन्होंने काकोरी कांड से जुड़े प्रसंगों और स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत की कहानियों के माध्यम से श्रोताओं को भावुक कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने सभागार में मौजूद लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाई।

किताबों की दुनिया में तकनीक पर मंथन

‘छाप 3.0’ के पहले दिन की चर्चाओं ने यह सवाल प्रमुखता से उठाया कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में साहित्य और पत्रकारिता अपनी विश्वसनीयता, मौलिकता और मानवीय संवेदना को कैसे कायम रखें। आयोजन ने किताबों की प्रासंगिकता के साथ यह संदेश भी दिया कि तकनीक एक साधन हो सकती है, लेकिन रचनात्मकता और अनुभवों की मानवीय दुनिया आज भी साहित्य की सबसे बड़ी ताकत है।

error: Content is protected !!
Exit mobile version