- भारत-ब्रिटेन के नेट जीरो लक्ष्य को मिलेगी नई रफ्तार, स्मार्ट ग्रिड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वच्छ ऊर्जा तकनीक पर मिलकर होगा रिसर्च
जमशेदपुर : भारत की ऊर्जा की व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में टाटा पावर ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी इम्पीरियल कॉलेज लंदन (Imperial College London) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य अगली पीढ़ी की ऊर्जा प्रणालियों को विकसित करना, नई तकनीकों पर शोध करना और भारत-ब्रिटेन के नेट जीरो लक्ष्यों को गति देना है।
इस सहयोग के तहत स्मार्ट पावर ग्रिड, ऊर्जा भंडारण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) और उद्योगों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने जैसे अहम क्षेत्रों में संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
स्मार्ट ग्रिड और AI से बदलेगी बिजली व्यवस्था
बिजली की बढ़ती मांग और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के बीच बिजली आपूर्ति को स्थिर, भरोसेमंद और लचीला बनाना बड़ी चुनौती है। टाटा पावर और इम्पीरियल कॉलेज लंदन इसी चुनौती का समाधान तलाशने के लिए मिलकर काम करेंगे।
साझेदारी में ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटी यानी बिजली ग्रिड की बदलती मांग और आपूर्ति के अनुरूप काम करने की क्षमता, ऊर्जा भंडारण तकनीक और डिजिटल एनर्जी सिस्टम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। AI और मशीन लर्निंग के इस्तेमाल से ऊर्जा प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर भी शोध होगा।
भारत-ब्रिटेन के नेट जीरो मिशन को मिलेगी मजबूती
भारत और ब्रिटेन के बीच स्वच्छ ऊर्जा तथा जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में यह साझेदारी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के India–UK Vision 2035 में ऊर्जा भंडारण, ग्रिड परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, हाइड्रोजन और कार्बन कैप्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्राथमिकता दी गई है।
इस साझेदारी से नई ऊर्जा तकनीकों पर शोध को व्यावहारिक इस्तेमाल तक पहुंचाने और कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा प्रणालियों के विकास के अवसर तलाशने का रास्ता खुलेगा।
टाटा पावर के अनुभव और ब्रिटिश रिसर्च का होगा संगम
टाटा पावर को बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक अनुभव हासिल है। वहीं, इम्पीरियल कॉलेज लंदन ऊर्जा प्रणालियों, इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक, अर्थशास्त्र और डीकार्बोनाइजेशन के क्षेत्र में शोध क्षमता रखता है।
दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता को जोड़कर उद्योगों की वास्तविक समस्याओं के समाधान तलाशने और नई तकनीकों के विकास की दिशा में काम किया जाएगा।
टाटा पावर के CEO ने क्या कहा?
टाटा पावर के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रवीर सिन्हा ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन अब ऐसे दौर में पहुंच रहा है, जहां नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ बिजली व्यवस्था की क्षमता, लचीलापन और विश्वसनीयता भी महत्वपूर्ण होगी।
उन्होंने कहा कि इम्पीरियल कॉलेज के साथ सहयोग से उद्योग की वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए गहन शोध और नए विचारों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इससे भारत की ऊर्जा जरूरतों के साथ वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में भी योगदान देने वाले समाधानों की संभावनाएं तलाश की जा सकेंगी।
ब्रिटेन ने भी साझेदारी को बताया अहम
ब्रिटेन के बिजनेस एंड ट्रेड सेक्रेटरी जोनाथन रेनॉल्ड्स ने कहा कि ब्रिटेन की शोध क्षमता और भारतीय उद्योगों की विशेषज्ञता मिलकर स्वच्छ एवं स्मार्ट ऊर्जा समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उनके अनुसार, इस तरह का सहयोग दोनों देशों में रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा करने में भी मददगार हो सकता है।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन की वाइस प्रोवोस्ट (रिसर्च एंड एंटरप्राइज) प्रोफेसर मैरी रयान ने भी इस साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि टाटा पावर के पास ऊर्जा तकनीकों का व्यापक अनुभव और बड़े स्तर पर समाधान लागू करने की क्षमता है, जबकि इम्पीरियल कॉलेज का शोध विज्ञान, इंजीनियरिंग और व्यवसाय के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़कर जटिल चुनौतियों का समाधान तलाशता है।
शोध से जमीन पर समाधान उतारने की तैयारी
इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य केवल शोध तक सीमित रहना नहीं, बल्कि नई तकनीकों के व्यावहारिक इस्तेमाल की संभावनाएं विकसित करना भी है। इसके जरिए अधिक लचीली, मजबूत और कम कार्बन उत्सर्जन वाली ऊर्जा प्रणालियों के विकास के लिए समाधान तैयार करने और उनके प्रदर्शन की संभावनाएं तलाशने पर जोर रहेगा।
भारत में बिजली की बढ़ती मांग और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतों के बीच यह सहयोग भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।




