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चाकुलिया डीआईईटी में राष्ट्रीय संगोष्ठी: एआई और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय पर मंथन - aksharsamvad.com
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चाकुलिया (पूर्वी सिंहभूम): मॉडल डीआईईटी, चाकुलिया द्वारा “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों का एकीकरण: एनईपी 2020 के आलोक में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी का सेतु” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

संगोष्ठी का शुभारंभ आयोजन सचिव विक्टर विजय समद के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद प्रधानाचार्य रामनाथ सिंह ने उपस्थित प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

विशिष्ट अतिथियों में डॉ. त्रिपुरा झा और डॉ. संध्या सिन्हा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए कहा कि तकनीक का उपयोग मानव हित में और मानव नियंत्रण में ही होना चाहिए। वहीं मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मी राम गोप ने भारतीय ज्ञान प्रणालियों को एआई के ढांचे में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका का विमोचन भी किया गया। इसके बाद तकनीकी सत्रों और शोध पत्र प्रस्तुतियों का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न राज्यों—असम, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और झारखंड—से आए लगभग 40 प्रतिभागियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए।

दूसरे दिन कार्यक्रम की शुरुआत पुनः उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जमशेदपुर के सहायक प्रोफेसर और एआई विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को दार्शनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए एआई के साथ इसके समन्वय पर प्रकाश डाला।

संगोष्ठी में प्रस्तुत कुछ प्रमुख शोध पत्रों में एनएसयू की कुमारी चंद्रावती का “एआई-आधारित स्मार्ट अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली” तथा शिक्षा में एआई के गुणात्मक विश्लेषण पर आधारित शोध शामिल रहा। वहीं असम के गुवाहाटी स्थित Voice of Environment की टीम ने “परंपरा और प्रौद्योगिकी का सेतु: उन्नत पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के साथ भारतीय स्वदेशी ज्ञान का एकीकरण” विषय पर शोध प्रस्तुत किया।

इसके अलावा झारखंड के शिक्षक ब्रज भूषण झा के नेतृत्व में “गणित, एल्गोरिदम और तर्क में प्राचीन भारतीय योगदान” विषय पर शोध पत्र भी प्रस्तुत किया गया, जिसे विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया।

संगोष्ठी का मुख्य फोकस वैदिक गणित, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग (ML) और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली (IKS) के वैज्ञानिक, नैतिक और तकनीकी पहलुओं पर रहा, साथ ही शिक्षा में इनके उपयोग पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम का समापन संयोजक डॉ. प्रियंका झा के धन्यवाद ज्ञापन, प्रमाण पत्र वितरण, प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया और राष्ट्रगान के साथ हुआ। सचिव ने संकाय सदस्यों डॉ. रजनी रंजन, बसंत कुमार मुंडा और अंकिता मुर्मू सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह संगोष्ठी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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