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जमशेदपुर में सरहुल पर्व की धूम, प्रकृति पूजा के साथ दिखी सामाजिक एकता की मिसाल - aksharsamvad.com
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जमशेदपुर में प्रकृति पूजा का महापर्व सरहुल इस वर्ष भी पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। आदिवासी समाज की गहरी आस्था, प्रकृति के प्रति समर्पण और सामाजिक एकता का यह पर्व शहर में खास संदेश दे रहा है।

सरहुल के मौके पर सुबह से ही आदिवासी समाज के पुरुष और महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजे-धजे पूजा स्थलों पर पहुंचे, जहां वृक्ष के नीचे विधिवत पूजा-अर्चना की गई। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक गीतों की गूंज से माहौल पूरी तरह भक्तिमय और उत्सवमय बना रहा।

इस दौरान एक खास और प्रेरणादायक तस्वीर भी सामने आई, जहां शहर के प्रसिद्ध समाजसेवी पप्पू सरदार ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर सरहुल पर्व में भाग लिया। वे सीतारामडेरा स्थित पौराणिक सरहुल पूजा स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर आदिवासी परंपराओं का सम्मान किया।

इतना ही नहीं, इस अवसर पर पप्पू सरदार ने महिलाओं के बीच वस्त्रों का वितरण भी किया, जिससे सामाजिक समरसता और सहयोग का संदेश और मजबूत हुआ।

पप्पू सरदार ने कहा कि सरहुल केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला उत्सव है। उन्होंने सभी से अपील की कि प्रकृति की सुरक्षा की जिम्मेदारी हम सभी की है और इसे मिलकर निभाना चाहिए।

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