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गैस संकट के बीच “प्रेरण चूल्हा” बना नया विकल्प, इंडक्शन कुकटॉप की मांग बढ़ी - aksharsamvad.com
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गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच अब लोग तेजी से इंडक्शन कुकटॉप यानी “प्रेरण चूल्हा” की ओर रुख कर रहे हैं। शहर से लेकर गांव तक यह बिजली से चलने वाला चूल्हा एक सुरक्षित और किफायती विकल्प के रूप में उभर रहा है।
क्या है इंडक्शन कुकटॉप?
इंडक्शन कुकटॉप एक आधुनिक रसोई उपकरण है, जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक यानी विद्युत-चुंबकीय तकनीक पर काम करता है। इसमें चूल्हे की सतह गर्म नहीं होती, बल्कि ऊर्जा सीधे बर्तन के निचले हिस्से को गर्म करती है। यही वजह है कि इसे “बिजली वाला चूल्हा” भी कहा जाता है।
 खास बर्तनों की जरूरत
इस चूल्हे पर खाना बनाने के लिए सामान्य बर्तनों की बजाय ऐसे बर्तनों की जरूरत होती है जिनका निचला हिस्सा चुंबकीय धातु जैसे लोहे या स्टील का हो। एल्यूमिनियम या कांच के बर्तन इसमें काम नहीं करते।
 सुरक्षा और फायदे
इंडक्शन चूल्हा गैस के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें खुली आग नहीं होती। साथ ही, ऊर्जा की बर्बादी भी कम होती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है।
 बिजली खपत का गणित
एक सामान्य इंडक्शन कुकटॉप 1200 से 2000 वॉट तक बिजली खपत करता है। औसतन 1500 वॉट मानें, तो यह एक घंटे में करीब 1.5 यूनिट बिजली खर्च करता है।
 परिवार के हिसाब से खर्च 
चार लोगों के परिवार में यदि दिन में 2 से 3 बार खाना बनता है, तो इंडक्शन का इस्तेमाल करीब 2.5 घंटे रोज होता है। ऐसे में रोजाना 3.5 से 4 यूनिट बिजली खर्च होती है।
महीने का कुल खर्च
अगर रोजाना औसतन 4 यूनिट बिजली खर्च हो, तो महीने में करीब 120 यूनिट की खपत होगी। यानी बिजली बिल में बढ़ोतरी जरूर होगी, लेकिन गैस की परेशानी से राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, गैस की किल्लत के इस दौर में इंडक्शन कुकटॉप एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। हालांकि, बिजली बिल और सही बर्तनों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए ही इसका इस्तेमाल करना समझदारी होगी।
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