ताजा खबर
‘शीशमहल’ पर सियासी घमासान, आतिशी ने भाजपा को दी घर की सच्चाई दिखाने की चुनौतीझारखंड में कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत! 6 मेडिकल कॉलेजों में रेडिएशन-डे केयर सेंटर, हर जिले में मिलेगी कीमोथेरेपी‘स्पिरिट’ पर छिड़ी बहस, संदीप रेड्डी वांगा के भाई ने फिल्म समीक्षकों को दी खुली चुनौती15 से 29 साल के युवाओं के लिए बड़ा मौका! 30 सितंबर तक दें विकसित भारत क्विज, दिल्ली तक पहुंचने का मिलेगा मौकाराष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल में BCCI की एंट्री, चुनाव अधिकारी एका ज्योति को मिली अहम जिम्मेदारीउत्तराखंड कांग्रेस में हलचल, हरीश रावत ने संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफाजमशेदपुर की हवा सबसे खराब! 153 के आंकड़े ने बढ़ाई चिंता, अब सेंसर बताएगा प्रदूषण का असली कारणएक घर, दो प्रेमी और खूनी अंजाम! प्रेमिका को प्राचार्य के साथ देख भड़का प्रेमी, लोहे की खंती से कर दी हत्यायूपी में दूध कारोबार से बदली महिलाओं की तकदीर, 72 हजार से ज्यादा बनीं ‘लखपति दीदी’माता सीता ने हनुमान जी को क्यों दिया था अमर होने का वरदान? सुंदरकांड की यह कथा जानिए‘शीशमहल’ पर सियासी घमासान, आतिशी ने भाजपा को दी घर की सच्चाई दिखाने की चुनौतीझारखंड में कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत! 6 मेडिकल कॉलेजों में रेडिएशन-डे केयर सेंटर, हर जिले में मिलेगी कीमोथेरेपी‘स्पिरिट’ पर छिड़ी बहस, संदीप रेड्डी वांगा के भाई ने फिल्म समीक्षकों को दी खुली चुनौती15 से 29 साल के युवाओं के लिए बड़ा मौका! 30 सितंबर तक दें विकसित भारत क्विज, दिल्ली तक पहुंचने का मिलेगा मौकाराष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल में BCCI की एंट्री, चुनाव अधिकारी एका ज्योति को मिली अहम जिम्मेदारीउत्तराखंड कांग्रेस में हलचल, हरीश रावत ने संगठनात्मक पदों से दिया इस्तीफाजमशेदपुर की हवा सबसे खराब! 153 के आंकड़े ने बढ़ाई चिंता, अब सेंसर बताएगा प्रदूषण का असली कारणएक घर, दो प्रेमी और खूनी अंजाम! प्रेमिका को प्राचार्य के साथ देख भड़का प्रेमी, लोहे की खंती से कर दी हत्यायूपी में दूध कारोबार से बदली महिलाओं की तकदीर, 72 हजार से ज्यादा बनीं ‘लखपति दीदी’माता सीता ने हनुमान जी को क्यों दिया था अमर होने का वरदान? सुंदरकांड की यह कथा जानिए
श्रद्धा के साथ पूर्ण हुआ छठ व्रत/उदईमान भगवान भास्कर को दिया गया अर्घ्य - aksharsamvad.com
Spread the love

 

महापर्व चैती छठ पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण सुबह का अर्घ्य (उषा अर्घ्य) अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ सम्पन्न हुआ। चार दिनों तक कठिन नियमों और तपस्या से किया जाने वाला यह व्रत आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो गया।
भोर की पहली किरण के साथ ही घाटों और तालाबों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। व्रती महिलाएं और पुरुष जल में खड़े होकर भगवान सूर्य और छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए अर्घ्य अर्पित करते दिखे। वातावरण भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
इस अवसर पर व्रतियों ने पूरी श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा। उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत पूरा किया। ठेकुआ, फल, गन्ना और अन्य पारंपरिक प्रसाद श्रद्धालुओं के बीच बांटे गए।
छठ महापर्व हमें प्रकृति, सूर्य और जल के महत्व का संदेश देता है। यह पर्व स्वच्छता, अनुशासन और सामूहिक आस्था का प्रतीक माना जाता है। परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते हैं, जिससे समाज में एकता और प्रेम की भावना मजबूत होती है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई छठी मैया की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
error: Content is protected !!
Exit mobile version