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हरिशंकर परसाई की कहानी उखड़े खंभे' के नाट्य रूपांतरण का मंचन, बाल कलाकारों की नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोहा - aksharsamvad.com
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जमशेदपुर : प्रसिद्ध कहानीकार हरिशंकर परसाई ने कई दशकों पहले अपनी कहानी “उखड़े खंभे” में देश में फैले भ्रष्टाचार और उसे दूर करने के व्यवस्था के प्रयासों पर तीखा व्यंग्य किया था। लेकिन वर्षों वर्ष बीतने के बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला। अब सवाल तो और भी गंभीर होते जा रहे हैं। महंगाई और भ्रष्टाचार ने आवाम की कमर तोड़ दी है, मुनाफाखोरी के खिलाफ आवाज बुलंद होती है, उसके खात्मे की आस जगती है, लेकिन व्यवस्था और मुनाफाखोर हमेशा कुछ न कुछ नया रास्ता निकाल ही लेते हैं, और जनता अपने दुःख दर्द को भूलकर दूसरी बातों में मशगूल हो जाती है। ट्राइबल कल्चर सेंटर में भारतीय जननाट्य संघ, जमशेदपुर के द्वारा आयोजित सात दिवसीय बाल रंग महोत्सव के समापन के मौके पर हरिशंकर परसाई की कहानी का नाट्य रूपांतरण बच्चों ने बड़े ही मनोरंजक अंदाज में प्रस्तुत किया। एक दिन ऐसी सुबह यहां पर आएगी, जब सबकुछ बेहतर होगा, यह आशा भी बच्चों की प्रस्तुति के माध्यम से खूब दिखी। कर्णप्रिय संगीत व मजबूत संवाद अदायगी से बच्चों ने दर्शकों का मन मोह लिया तथा सैकड़ों दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ भूरि भूरि प्रशंसा की।

नाटक की शुरुआत छत्तीसगढ़ी लोकनाट्य नाचा शैली में प्रसिद्ध कलाकार व निर्देशक निसार अली, पार्थ बनर्जी, श्वेता गुप्ता व साथियों ने शुरू की, फिर बच्चों ने मुख्य कहानी को आगे बढ़ाया। इससे पहले जमशेदपुर इप्टा के अध्यक्ष प्रो अहमद बद्र ने स्वागत भाषण में बताया कि इंसान को इंसान बनाने के लिए नाटक एक महत्वपूर्ण विधा है। बचपन में ही बच्चों का नाटक से जुड़ना उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील बनाता है, वहीं उन्हें बढ़ती उम्र में बुरी आदतों व भटकाव से भी रोकता है। कार्यक्रम के दौरान चुटीले अंदाज में प्रस्तुत “पापी हो गये नैना” नाटक के माध्यम से मोबाइल में डूबती पीढ़ी की सच्चाई भी दिखी। वहीं बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान इप्टा की अर्पिता, वरिष्ठ रंगकर्मी शांति , कामरेड शशि , डॉ एस के झा, साहित्यकार रणेंद्र , जकारिया , मिथिलेश समेत जमशेदपुर, रांची, हजारीबाग, डाल्टेनगंज, घाटशिला के सैकड़ों कलाकार व दर्शक मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम संचालन संजय सोलोमन व अर्पिता ने किया। कार्यक्रम का समापन बाल रंग शिविर में भाग लेने वाले 24 बाल कलाकारों को सम्मान के साथ हुआ। बाल रंग शिविर का आयोजन प्रसिद्ध फिल्मकार, लेखक व पत्रकार खवाज़ा अहमद अब्बास की स्मृति में किया गया था।

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