



मिली जानकारी के अनुसार, सुनील यादव को 13 मार्च को कमजोरी की शिकायत के बाद अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। 14 मार्च की रात उनकी पत्नी गुड़िया देवी, जो स्वयं हृदय रोग से पीड़ित हैं, कुछ समय के लिए घर चली गईं। सुबह लौटने पर सुनील के गायब होने की जानकारी मिली, जिसके बाद परिजनों ने लगातार खोजबीन शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
सोमवार शाम करीब 6 बजे एक चाय विक्रेता द्वारा सुरक्षाकर्मियों को सूचना देने के बाद अस्पताल परिसर में पोस्टमार्टम हाउस के पास बाउंड्री वॉल के किनारे कचरे के बीच शव देखा गया। शव से दुर्गंध आ रही थी और आसपास मक्खियां भिनभिना रही थीं। मृतक के हाथ में अब भी नीडिल लगी हुई थी।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे और जमकर हंगामा किया। मौके पर एमजीएम थाना पुलिस और अस्पताल प्रशासन को बुलाया गया।
मृतक के पुत्र अभय यादव ने आरोप लगाया कि पिछले 9 दिनों तक अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और परिवार को कोई सहयोग नहीं मिला। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि 14 मार्च की रात सुनील अस्पताल के मुख्य गेट तक पहुंचे थे, लेकिन उसके बाद उनका कोई पता नहीं चल सका।
प्राथमिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि वे गार्ड रूम के पास लघुशंका के लिए गए होंगे और वहीं गिरने के बाद उनका शव बाउंड्री के पास पड़ा रह गया। हालांकि परिजन इस पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
