
महासभा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि हर वर्ष 23 अप्रैल को महादानवीर भामाशाह की जयंती देश के कई राज्यों, खासकर झारखंड में धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन अब तक इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है।
जिला अध्यक्ष राकेश साहू ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि महात्मा शाहूजी महाराज सामाजिक न्याय और समानता के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिससे वे एक महान समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं।
महासभा का कहना है कि यदि भामाशाह जयंती को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाता है, तो इससे समाज में सम्मान और गर्व की भावना और मजबूत होगी। साथ ही आने वाली पीढ़ियों को भी उनके योगदान के बारे में जानने और प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।

