जमशेदपुर: स्वदेशी जागरण मंच, जमशेदपुर महानगर का जिला सम्मेलन रविवार को बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख अन्नदा शंकर पनिग्रही थे।उन्होंने स्वदेशी की व्यापक अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि स्वदेशी केवल वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन के हर क्षेत्र भाषा, भोजन, वेशभूषा, व्यवहार और विचार में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल नौकरी खोजने वाले न बनें, बल्कि उद्यमी बनकर रोजगार देने वाले बनें। उन्होंने “अंत्योदय” की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि विकास तभी सार्थक होगा जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे स्वदेशी अपनाएं,स्थानीय उत्पाद खरीदें, छोटे व्यापारियों को बढ़ावा दें, जरूरत के अनुसार जीवन जिएं, देशभक्ति को व्यवहार में लाएं तभी भारत एक आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बन सकता है
सम्मेलन में उपस्थित अन्य वक्ताओं ने भी स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, छोटे व्यापारियों के संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के संवर्धन पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने वर्तमान विकास मॉडल पर भी प्रश्न उठाए और कहा कि केवल उपभोग आधारित विकास हमें पर्यावरण संकट की ओर ले जा रहा है। उन्होंने “सस्टेनेबल डेवलपमेंट” के साथ-साथ “सनातन विकास” की अवधारणा को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए रखा जाता है।स्वदेशी उत्पादों के उपयोग, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, छोटे व्यापारियों के संरक्षण तथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों के संवर्धन पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आज पुरे देश में रोजगार की समस्या जो उत्पन्न हुई है उसका निदान स्वरोजगार से होगा जिसको पूरा करने में हमारा मंच mysba पटल से अनेको परियोजना का मॉडल उपलब्ध करा कर करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हम दुनिया की पांचवीं अर्थव्यवस्था है लेकिन प्रति व्यक्ति आय के अनुसार हम 142 वे स्थान में है। हम पूरे विश्व की जनसंख्या के लगभग 18.5% हैं लेकिन विश्व की कुल आमदनी का 3.5 % आय का अर्जन ही हम कर पा रहे हैं। इस परिदृश्य से निपटने के लिए हमे दो प्रमुख काम करने होंगे – पहला जितने उत्पाद का भारतीय विकल्प यदि हमारे पास है तो हमे उसे ही लेना चाहिए और दूसरा हमारी शिक्षा पद्धति में अनुसंधान सम्बंधित विषयों एवं प्रोजेट्स को जोड़ना होगा। साथ ही हमारी सारी भारतीय कंपनियां रिसर्च एंड डेवलपमेंट में यदि अपना ध्यान बढ़ा दें तो आने वाले समय में हम भी चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे विकसित देशों को कड़ी टक्कर दे सकते हैं।


