जमशेदपुर के गोलमुरी स्थित अकाशदीप प्लाजा परिसर इन दिनों एक गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे को लेकर चर्चा में है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है, और हैरानी की बात यह है कि इस पर ना तो प्रशासन का कोई ठोस एक्शन दिखाई दे रहा है और ना ही किसी प्रकार का भय ,पेड कटने को लेकर पहले भी सुर्खियों मे था , जिसमे की दवा का प्रयोग कर सुखाया जा रहा था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस जगह पर कभी राहगीर रुककर पेड़ों की छांव में ठंडी हवा का आनंद लेते थे, वहां अब धीरे-धीरे हरियाली खत्म कर उसे बंजर बनाने की कोशिश की जा रही है। बताया जा रहा है कि इस इलाके में पार्किंग और दुकानों के निर्माण के लिए पेड़ों को काटा जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह सब बिना किसी अनुमति के हो रहा है, या फिर कहीं न कहीं प्रशासन की मौन सहमति इसमें शामिल है? जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) और अन्य प्रशासनिक इकाइयों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में पहले ही हरियाली की भारी कमी हो रही है। ऐसे में इस तरह पेड़ों की कटाई न केवल पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर भी नकारात्मक प्रभाव डालेगा ।

*अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है—
क्या प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेगा या फिर यूं ही हरियाली का गला घोंटने दिया जाएगा? जवाब आखिर देगा कौन?*

