रांची: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार झारखंड में दस्तक दे दी है। हालांकि इस वर्ष मानसून केरल पहुंचने में सामान्य से तीन दिन देर हुई, लेकिन झारखंड में इसकी एंट्री पिछले साल की तुलना में पांच दिन पहले दर्ज की गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार शुक्रवार को बंगाल की खाड़ी की ओर से आगे बढ़ते हुए मानसून ने संताल परगना क्षेत्र के रास्ते राज्य में प्रवेश किया। मानसून के आगमन के साथ जामताड़ा, देवघर, गोड्डा, पाकुड़, साहिबगंज, धनबाद, गिरिडीह और पूर्वी सिंहभूम के कई इलाकों में इसका प्रभाव देखने को मिला है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि अगले 72 घंटों के दौरान मानसून राज्य के अन्य हिस्सों में भी तेजी से फैल सकता है। वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां इसके आगे बढ़ने के लिए अनुकूल बनी हुई हैं।11 जून को पश्चिम बंगाल और बिहार में प्रवेश करने के बाद मानसून ने झारखंड की सीमा में कदम रखा। इससे पहले रांची, बोकारो, धनबाद और जमशेदपुर सहित कई शहरों में प्री-मानसून बारिश हो चुकी है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। हालांकि इस बार मानसून सीजन को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव के कारण झारखंड में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। अनुमान है कि राज्य में औसत से 30 से 35 प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है। यदि ऐसा होता है तो धान की खेती और खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सभी जिलों से वैकल्पिक फसलों और उनकी उपयुक्त किस्मों की जानकारी मांगी गई है। साथ ही कृषि, पशुपालन, मत्स्य और गव्य विकास विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित कंपनियों से संपर्क किया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त बीज भंडारण की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कम बारिश की स्थिति में भी किसानों को न्यूनतम नुकसान हो।


