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पानी की कमी और जंगलों की कटाई ने बढ़ाई मुसीबत, इंसानी विस्तार के बीच दम तोड़ रहे वन्यजीव
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अक्षर संवाद छतरपुर, पलामू
झारखंड राज्य के पिछड़े जिलों में शुमार पलामू जिले के छतरपुर थाना क्षेत्र में रविवार, 19 अप्रैल को एक मार्मिक घटना सामने आई, जिसने जंगल और वन्यजीवों की बदहाल स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पानी और चारे की तलाश में जंगल से भटक कर हिरणों का एक झुंड शहर तक पहुंच गया, जहां कुत्तों के हमले में एक हिरण की दर्दनाक मौत हो गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब 12 हिरणों का झुंड सुबह हाई स्कूल मैदान तक पहुंचा था। इसी दौरान एक हिरण, झुंड से बिछड़कर सोनार मोहल्ला में पहुंच गया, जहां आवारा कुत्तों ने उसे घेरकर बुरी तरह जख्मी कर दिया। गंभीर रूप से घायल हिरण ने कुछ ही देर में दम तोड़ दिया।
घटना की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत हिरण को अपने साथ ले गई। प्रभारी वनपाल लक्ष्मीकांत पांडे ने बताया कि हिरण का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिससे मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी, पानी की कमी और लगातार हो रही जंगलों की कटाई के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। ऐसे में जानवर भोजन और पानी की तलाश में गांव और शहर की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं।
वन विभाग के अनुसार, पूर्वी वन क्षेत्र में जानवरों के लिए 15 नाले बनाए गए हैं और डैम-चेकडैम में भी पानी की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद कई इलाकों में पानी की कमी और प्राकृतिक संसाधनों के घटने से जानवर भटक रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि हिरणों का यह झुंड महुअरी क्षेत्र के जंगल से भटककर छतरपुर पहुंचा।
इधर, ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में नीलगाय, बंदर, लंगूर और हिरण जैसे जंगली जानवरों का गांवों में आना बढ़ गया है, जिससे फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
यह घटना केवल एक हिरण की मौत नहीं, बल्कि उस संकट की चेतावनी है, जिसमें जंगल सिकुड़ रहे हैं और वन्यजीव इंसानी बस्तियों में भटकने को मजबूर हो रहे हैं। अब जरूरत है कि जंगलों के संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वन्यजीवों के सुरक्षित आवास पर गंभीरता से काम किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके
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