

आई हॉस्पिटल के समीप आयोजित इस प्रदर्शन में 70 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्य, LGBTQIA+ समुदाय के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पोस्टर और प्लेकार्ड के जरिए अपनी मांगें रखीं और “हमारे बारे में कोई निर्णय, हमारे बिना नहीं” जैसे नारों के साथ विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह संशोधन विधेयक ट्रांसजेंडर समुदाय के स्व-पहचान के अधिकार को कमजोर करता है। उनका आरोप है कि विधेयक में चिकित्सा बोर्ड की अनिवार्यता थोपने का प्रावधान किया गया है, जो समुदाय की गरिमा और स्वतंत्रता के खिलाफ है।
गौरतलब है कि यह विधेयक 13 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसके बाद से देशभर में इसका विरोध शुरू हो गया है। जमशेदपुर में भी इसी कड़ी में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की है कि इस विधेयक को या तो वापस लिया जाए या इसे संसदीय समिति के पास भेजा जाए, ताकि व्यापक चर्चा के बाद एक समावेशी और न्यायसंगत कानून तैयार किया जा सके। साथ ही 23 मार्च को होने वाली अगली चर्चा में स्व-पहचान के अधिकार को बहाल करने और चिकित्सा बोर्ड की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग भी दोहराई गई।
