
उन्होंने विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक निरंतरता को प्रभावित करने वाली शैक्षणिक, व्यवहारिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक तथा सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने समस्याओं की प्रारंभिक पहचान, मनोसामाजिक सहयोग और प्रभावी मार्गदर्शन की विभिन्न विधियों की जानकारी दी। साथ ही छात्रों में मानसिक मजबूती, भावनात्मक संतुलन और समग्र विकास को बढ़ावा देने में शिक्षकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। दूसरा सत्र “परिणाम आधारित शिक्षा और सक्रिय शिक्षण पद्धति” विषय पर आयोजित हुआ, जिसे कोलकाता की मनोचिकित्सीय विशेषज्ञ एन. टी. रूपा ने संचालित किया। उन्होंने छात्र-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों को परिणाम आधारित शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। सत्र में पाठ्यक्रम लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षण, दक्षता विकास, सक्रिय अधिगम तकनीक, सहयोगात्मक एवं अनुभवात्मक शिक्षण, सतत मूल्यांकन और गुणवत्ता सुधार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता और सहभागितापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने के लिए नवाचारपूर्ण शिक्षण उपायों की भी जानकारी दी। दोनों सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक और संवादात्मक रहे। प्रतिभागियों को छात्र सहायता व्यवस्था, प्रभावी मार्गदर्शन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।