
चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत लुपुंगडीह पंचायत के बाना गांव में पिछले चार-पांच दिनों से एक सिंगल टस्कर हाथी ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। चांडिल वन क्षेत्र के बाना जंगल से निकलकर हाथी रोज शाम ढलते ही गांव और खेतों की ओर पहुंच रहा है। हाथी के लगातार गांव में प्रवेश करने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
दूध भरी धान की फसल को रौंद रहा हाथी
ग्रामीणों के मुताबिक हाथी खेतों में पहुंचकर किसानों की तैयार हो रही धान की फसल को खा रहा है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में फसल पैरों तले रौंदकर बर्बाद कर दे रहा है। किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत के बाद तैयार फसल को हाथी कुछ ही देर में तबाह कर दे रहा है।
सूचना मिलने के बाद वन विभाग ने एलिफेंट ड्राइव टीम को मौके पर भेजा है, ताकि हाथी को गांव और आबादी वाले इलाकों से दूर जंगल की ओर खदेड़ा जा सके।
लौकी, बैंगन, कद्दू से लेकर धान तक बन रहा हाथियों का निवाला
ग्रामीणों के अनुसार इलाके के जंगलों में हाथियों की मौजूदगी लगातार बनी हुई है। भोजन-पानी की तलाश में हाथी आसपास के गांवों और खेतों का रुख कर रहे हैं। खेतों में लगी लौकी, बैंगन, कद्दू समेत अन्य फसलों के साथ धान को भी हाथी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
कई बार हाथी खेतों से निकलकर सीधे गांव में पहुंच जाते हैं और घरों में रखे अनाज को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार कुछ घटनाओं में घरों को भी क्षति पहुंची है।
सिंगल टस्कर से ज्यादा डर, कब पहुंच जाए पता नहीं चलता
ग्रामीणों का कहना है कि झुंड में हाथी आने पर आवाज और गतिविधियों से पहले ही लोगों को सतर्क होने का मौका मिल जाता है, लेकिन सिंगल टस्कर अचानक गांव में प्रवेश कर जाता है। शाम के बाद ग्रामीण घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।
फसल नुकसान के मुआवजे की मांग
ग्रामीणों ने वन विभाग से फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने और हाथी से सुरक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था करने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग की ओर से मोबाइल और पटाखे उपलब्ध कराए जाते हैं, लेकिन हाथियों को गांव में आने से रोकने के लिए स्थायी उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर हाथी का गांव में आना नहीं रुका तो जान-माल के नुकसान का खतरा और बढ़ सकता है। वहीं, वन विभाग की एलिफेंट ड्राइव टीम हाथी को सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर करने में जुटी है।











