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जमशेदपुर: टाटा स्टील की वार्षिक आम बैठक (AGM) 2026 में कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने वित्त वर्ष 2025-26 के प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद टाटा स्टील ने हर मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब “बड़ी, हरित (Greener), स्मार्ट और अधिक लचीली (Resilient)” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगी। अपने संबोधन में चंद्रशेखरन ने कहा कि वर्ष 2026 की शुरुआत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक रही, लेकिन पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के कारण महंगाई और उत्पादन पर असर पड़ा। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही और घरेलू मांग तथा मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के दम पर 7.6 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की गई। भारतीय स्टील उद्योग ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उत्पादन में 10.7 प्रतिशत और मांग में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की।

उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में टाटा स्टील का कंसोलिडेटेड राजस्व 6 प्रतिशत बढ़कर 2,32,140 करोड़ रुपये हो गया। वहीं EBITDA 35 प्रतिशत बढ़कर 34,848 करोड़ रुपये और शुद्ध लाभ (PAT) 243 प्रतिशत बढ़कर 10,886 करोड़ रुपये पहुंच गया। भारत में कंपनी ने 23.4 मिलियन टन कच्चे इस्पात का रिकॉर्ड उत्पादन किया, जबकि कुल डिलीवरी लगभग 22.5 मिलियन टन रही। कंपनी का शुद्ध कर्ज भी घटा है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति और मजबूत हुई है। चेयरमैन ने बताया कि निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 24 रुपये प्रति इक्विटी शेयर लाभांश देने की सिफारिश की है। उन्होंने कहा कि ओडिशा स्थित कलिंगानगर प्लांट के दूसरे चरण का विस्तार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही टाटा स्टील की कुल उत्पादन क्षमता 26.1 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) हो गई है। कलिंगानगर की क्षमता 3 MTPA से बढ़ाकर 8 MTPA कर दी गई है। यहां भारत की सबसे बड़ी ब्लास्ट फर्नेस और अत्याधुनिक कोल्ड रोलिंग मिल स्थापित की गई है, जिससे ऑटोमोबाइल, रक्षा और उच्च गुणवत्ता वाले फ्लैट स्टील उत्पादों के क्षेत्र में कंपनी की स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने दोहराया कि कंपनी का दीर्घकालिक लक्ष्य 40 MTPA उत्पादन क्षमता हासिल करना है।

यूरोप में चल रही परियोजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के पोर्ट टैलबोट में 1.25 अरब पाउंड की इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। वहीं नीदरलैंड्स में पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप दीर्घकालिक समाधान तैयार करने के लिए सरकार और अन्य हितधारकों के साथ लगातार बातचीत चल रही है। चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा स्टील तकनीक और डिजिटल परिवर्तन पर भी तेजी से काम कर रही है। कंपनी ने उत्पादन, गुणवत्ता, सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए 860 से अधिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल लागू किए हैं। वहीं कंपनी के डिजिटल प्लेटफॉर्म Aashiyana और DigECA का संयुक्त ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (GMV) बढ़कर 9,360 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 161 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा टाटा स्टील की सर्वोच्च प्राथमिकता है और कंपनी का लक्ष्य सभी संयंत्रों में ‘जीरो हार्म’ सुनिश्चित करना है। इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 473 करोड़ रुपये CSR गतिविधियों पर खर्च किए, जिससे देशभर में 69 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला। टाटा स्टील भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, क्षमता विस्तार और सामाजिक जिम्मेदारियों पर समान रूप से काम कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि शेयरधारकों, कर्मचारियों और ग्राहकों के सहयोग से कंपनी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों को हासिल करेगी।

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