
पोटका: पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। संक्रमण की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में बड़े स्तर पर जांच अभियान चलाया, जिसमें 1,233 से अधिक ग्रामीणों की स्क्रीनिंग की गई। जांच के दौरान 60 नए लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई। लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। मलेरिया प्रभावित 26 गांवों में डॉक्टरों, एमपीडब्ल्यू और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमों ने शिविर लगाकर ग्रामीणों की जांच की। जिन लोगों में संक्रमण मिला, उन्हें तत्काल दवा उपलब्ध कराई गई और जरूरत के अनुसार अस्पताल भेजा गया। विभाग का कहना है कि लगातार सर्वे और जांच अभियान जारी रहेगा ताकि संक्रमण को तेजी से नियंत्रित किया जा सके।
सीएचसी में सात मरीजों का इलाज जारी
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पोटका में गुरुवार को चार नए मरीजों को भर्ती कराया गया। पहले से भर्ती नौ मरीजों में से पांच के स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल अस्पताल में सात मरीजों का इलाज चल रहा है। चिकित्सकों की निगरानी में सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
चार मौतों के बाद केंद्रीय टीम ने संभाला मोर्चा
पोटका में मलेरिया से अब तक चार लोगों की मौत और लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार के क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय, पटना की केंद्रीय टीम ने इलाके का दौरा किया। पूर्वी सिंहभूम के सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के साथ टीम ने प्रभावित गांवों और स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर रोकथाम एवं उपचार की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों से मच्छरदानी का नियमित उपयोग करने, बुखार आने पर तुरंत जांच कराने और आसपास जलजमाव नहीं होने देने की अपील की। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से लक्षण दिखने पर इलाज में देरी नहीं करने की भी सलाह दी है।
संसाधनों की कमी से बढ़ी मुश्किलें
संक्रमण पर काबू पाने की कोशिशों के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था संसाधनों की कमी से भी जूझ रही है। सीएचसी पोटका की दो 108 एंबुलेंस खराब होने के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी हो रही है। वहीं मलेरिया जांच अभियान के लिए पर्याप्त संख्या में एमपीडब्ल्यू, एएनएम और डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने से स्वास्थ्य विभाग पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों के साथ अभियान लगातार चलाया जा रहा है। प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को जल्द से जल्द तोड़ा जा सके। लगातार जांच, दवा वितरण और जागरूकता अभियान के जरिए मलेरिया पर नियंत्रण पाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं।