
जमशेदपुर: जमशेदपुर और झारखंड के लिए गौरव का क्षण है। देश की राजधानी नई दिल्ली में लाल किले पर आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान देश की प्रमुख झीलों के नाम पर दर्शक दीर्घाओं का नामकरण किया गया। इसमें जमशेदपुर की ऐतिहासिक डिमना लेक को भी स्थान मिला। देशभर की 25 प्रमुख झीलों को सम्मान देते हुए बनाए गए इन दर्शक दीर्घाओं में डिमना लेक का शामिल होना जमशेदपुर की जल संरक्षण और दूरदर्शी जल प्रबंधन की विरासत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने जैसा है।
डिमना लेक सिर्फ जमशेदपुर की खूबसूरत पहचान नहीं, बल्कि आठ दशक से अधिक समय से शहर की जल जरूरतों को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण जल संरचना है। दलमा की पहाड़ियों की तलहटी में स्थित यह जलाशय पर्यावरण, जल सुरक्षा और पर्यटन—तीनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
1940 में शुरू हुआ था निर्माण
डिमना लेक की कहानी वर्ष 1940 के दशक में शुरू हुई। तेजी से बढ़ते जमशेदपुर की भविष्य की जल जरूरतों को देखते हुए टाटा स्टील ने डिमना नाला वाटर सप्लाई स्कीम की परिकल्पना की। फरवरी 1940 में जलाशय का निर्माण शुरू हुआ और वर्ष 1944 में परियोजना पूरी हुई। 17 अप्रैल 1944 को पहली बार डिमना लेक से शहर को पानी की आपूर्ति शुरू हुई। करीब 7,500 मिलियन गैलन की जल भंडारण क्षमता के साथ तैयार किया गया यह जलाशय उस दौर में दूरदर्शी जल प्रबंधन का उदाहरण था। आठ दशक से अधिक समय बाद भी डिमना लेक जमशेदपुर की जल व्यवस्था का अहम हिस्सा बनी हुई है। डिमना लेक आसपास के प्राकृतिक जंगलों और पहाड़ी क्षेत्र के कारण पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। सालभर यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। नौकायन और रोइंग जैसी गतिविधियों ने इसे जमशेदपुर के प्रमुख मनोरंजक स्थलों में शामिल कर दिया है।
टाटा स्टील की जल संरक्षण विरासत
डिमना लेक टाटा स्टील की दीर्घकालिक जल प्रबंधन सोच का भी उदाहरण है। टाटा स्टील और टाटा स्टील यूआईएसएल द्वारा जलाशय की सुरक्षा, निगरानी और संचालन पर लगातार ध्यान दिया जाता है। डैम की संरचना, जलस्तर और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी के जरिए सुरक्षित और विश्वसनीय जल व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास जारी है। लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में डिमना लेक को मिली पहचान केवल एक जलाशय का सम्मान नहीं, बल्कि जमशेदपुर की आठ दशक पुरानी जल सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की सोच का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।