
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा अभियान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने कई राज्यों में व्यापक अभियान चलाया। इस दौरान 200 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी अभियान के तहत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी ATS और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई तेज हुई।
एजेंसी के अनुसार, पिछले करीब सात महीनों में हापुड़, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत विभिन्न स्थानों से 16 संदिग्धों को पकड़ा गया है। इनमें कई लोगों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क मेरठ से जुड़े होने का दावा किया गया है।
जफर पर आतंकी नेटवर्क के लिए धन जुटाने का आरोप
ATS की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, जफर कथित तौर पर संगठन के लिए चंदा एकत्र करता था और उस रकम को आगे पहुंचाने में मदद करता था। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि उसका नेटवर्क केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित था या वह अन्य संदिग्ध लोगों के बीच संपर्क का माध्यम भी बना हुआ था।
पूछताछ के आधार पर उसके बैंक खातों, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी खंगाली जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जफर किन लोगों के निर्देश पर कथित रूप से काम कर रहा था।
बुलंदशहर के मदरसे से जुड़ा कनेक्शन भी जांच के घेरे में
जांच में जफर का संपर्क बुलंदशहर स्थित एक मदरसे से सामने आने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि मदरसे से जुड़े एक परिचित ने वर्ष 2017 में उसे पढ़ाई के लिए मेरठ बुलाया था। इसके बाद उसके संपर्क में आए लोगों और उसकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है।
ATS का मानना है कि जफर की गिरफ्तारी के बाद भी कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने नहीं आई है। इसलिए उसके पुराने और वर्तमान संपर्कों की पड़ताल जारी है।
पहले हिरासत, दस्तावेजों की जांच के बाद दोबारा गिरफ्तारी
ATS ने जफर को पहले हापुड़ के शेरपुर क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से हिरासत में लिया था। उसके पास उर्दू भाषा में कुछ दस्तावेज मिले थे। दस्तावेजों के सत्यापन और अनुवाद की प्रक्रिया के बाद उस समय उसे छोड़ दिया गया था। बाद की जांच में उसके खिलाफ नई जानकारी मिलने का दावा किया गया, जिसके आधार पर उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया।
बिहार से पासपोर्ट और पाकिस्तान जाने की कथित तैयारी
अधिकारियों के अनुसार, जफर ने बिहार से पासपोर्ट बनवाया था और कथित तौर पर पाकिस्तान जाने की तैयारी कर रहा था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि प्रस्तावित यात्रा का उद्देश्य क्या था और वहां उसकी किन लोगों से मुलाकात होनी थी।
ATS के अनुसार, पासपोर्ट को निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। फिलहाल जांच एजेंसी जफर के कथित संपर्कों, आर्थिक लेन-देन और विदेश यात्रा की योजना से जुड़े तथ्यों को जोड़ने में जुटी है। मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।