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सिमडेगा: जलडेगा प्रखंड में जंगली हाथियों का आतंक एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। शनिवार रात सौंडीडीपा गांव में हाथी के हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में दहशत के साथ वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश भी भड़क उठा। रविवार सुबह लोगों ने सड़क जाम कर हाथियों से सुरक्षा और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता देने की मांग की। जानकारी के मुताबिक, जलडेगा थाना क्षेत्र के कोनमेरला पंचायत के सौंडीडीपा गांव में शनिवार रात जंगली हाथी पहुंच गया था। हाथी के गांव में आने की सूचना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण बाहर निकल आए। ग्रामीणों ने मशाल और लाठी-डंडों की मदद से हाथी को आबादी वाले इलाके से दूर भगाने की कोशिश शुरू कर दी। इसी दौरान हाथी अचानक ग्रामीणों की तरफ बढ़ गया। भगदड़ के बीच भुन्डुपानी निवासी नोवेल बरला और कालू प्रधान हाथी की चपेट में आ गए। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के समय तेज बारिश भी हो रही थी, जिससे स्थिति और ज्यादा भयावह हो गई।

हाथी के डर से घर छोड़ने को मजबूर ग्रामीण
दो लोगों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही से इलाके में भय का माहौल बना हुआ है। लोगों को रात में घरों से बाहर निकलने में डर लग रहा है। कई परिवार अपने बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर करने के लिए प्रभावी अभियान चलाने की मांग की है। साथ ही मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देने की मांग उठाई गई है।

मौत के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण
दो ग्रामीणों की मौत से नाराज लोगों ने रविवार सुबह जलडेगा में सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों ने वन विभाग पर हाथी समस्या को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। लोगों ने कहा कि लगातार हो रहे हाथी हमलों को रोकने के लिए सिर्फ तत्काल कार्रवाई नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है।
घटना को लेकर कोलेबिरा विधायक नमन बिक्सल कोनगाड़ी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने वन विभाग को हाथी समस्या के लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा कि इस मुद्दे के स्थायी समाधान की मांग सरकार के समक्ष रखी जाएगी। जरूरत पड़ी तो मामले को विधानसभा में भी उठाया जाएगा।
ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाए, संवेदनशील गांवों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए और हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए ठोस योजना तैयार की जाए।

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