
चाकुलिया वन क्षेत्र में वन भूमि पर बांस नहीं के बराबर हैं। किसानों और व्यापारियों की सुविधा के लिए बांस को सरकार ने ट्रांसिट रूल से मुक्त रखा है। इस वन क्षेत्र के चाकुलिया, बहरागोड़ा और धालभूमगढ़ प्रखंड में किसानों ने अपनी रैयती भूमि पर बड़े पैमाने पर बांस की खेती की है। यहां उत्पादित बांस देश के विभिन्न राज्यों में भेजे जाते हैं। एक आकलन के मुताबिक चाकुलिया वन क्षेत्र रोजाना 20 से 25 ट्रक बांस दूसरे राज्यों में भेजे जाते हैं। बांस क्षेत्र के किसानों,मजदूरों और व्यवसायी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। परंतु हाथियों के कारण बांस की खेती बर्बाद हो रही है। किसान तबाह हो रहे हैं। बांस का राइजोम जंगली हाथियों का एक प्रमुख भोजन बन गया है। हाथी इसे बड़े चाव से खा रहे हैं। इसके लिए जंगली हाथी बांस के बागानों उजाड़ रहे हैं और किसान अपनी बर्बादी का तमाशा देख रहे हैं। हाथी प्रभावित इलाकों में बांस की खेती सर्वाधिक होती है। जमुआ के किसान कुनू मुंडा, प्रभाष हांसदा, कुशराम सिंह मुंडा, मौरबेड़ा के पुकूल मुंडा समेत सैकड़ों किसानों का कहना है कि जंगली हाथियों का दंश पिछले सात साल से झेल रहे हैं। इस वर्ष तो हाथियों का उपद्रव काफी बढ़ गया है। वन विभाग हाथियों को भगाने में अब तक विफल साबित हुआ है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि अगर हाथियों से बांस की फसल की सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो बांस की खेती तबाह हो जाएगी। किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो जाएंगे। साथ ही सैकड़ों मजदूर भी बेरोजगार हो जाएंगे।
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