
जमशेदपुर: कुड़माली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो समेत चार सांसदों ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। सांसदों ने गृह मंत्री को मांग पत्र सौंपते हुए कुड़माली भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पुरुलिया के सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो, गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और राज्यसभा सांसद खीरू महतो भी शामिल रहे।
सांसदों ने कहा कि कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से विभिन्न मंचों पर उठती रही है। कुड़माली पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र की महत्वपूर्ण भाषा है। इसके अलावा झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इसका व्यापक रूप से प्रयोग होता है। सांसदों के अनुसार, यह भाषा सदियों से क्षेत्र के लोगों की सामाजिक, सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही है।
कुड़माली भाषी समुदाय की बड़ी आबादी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर के अलावा झारखंड के रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, गिरिडीह, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में रहती है। ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर और सुंदरगढ़ में भी यह भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।
सांसदों ने कहा कि कुड़माली का अपना समृद्ध लोक साहित्य, गीत, कविता, लोककथा और मौखिक परंपरा है। झुमर, टुसू, करम और छऊ जैसी लोक सांस्कृतिक परंपराओं से भी इसका गहरा संबंध है। आठवीं अनुसूची में शामिल होने से कुड़माली भाषा और साहित्य के संरक्षण, शैक्षणिक एवं अनुसंधान कार्यों तथा लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलेगा।
सांसदों के मुताबिक गृह मंत्री अमित शाह ने मांग को गंभीरता से सुना और इसे जायज तथा व्यापक जनहित से जुड़ा विषय बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सभी भारतीय भाषाओं और साहित्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कुड़माली समेत कुछ अन्य भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मामला लंबित है और सरकार जल्द ही इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।